Ghar Se Nikalte Waqt Ki Dua एक छोटी मगर बहुत ताक़तवर दुआ है, जो रसूलुल्लाह ﷺ ने हर मुसलमान को घर से बाहर जाते वक़्त पढ़ने की तालीम दी है। यह दुआ एक मुसलमान को अल्लाह के भरोसे पर अपना दिन शुरू करने की याद दिलाती है। जब कोई शख़्स घर से निकलते वक़्त यह दुआ पढ़ता है, तो अल्लाह ता’आला उसकी हिफ़ाज़त करता है और शैतान उसके रास्ते से दूर हो जाता है।
रोज़ मर्रा की ज़िंदगी में हम काम, स्कूल, बाज़ार या किसी भी ज़रूरत के लिए घर से बाहर निकलते हैं। हर बार घर से निकलते वक़्त दुआ पढ़ना एक सुन्नत अमल है जो छोटा लगता है मगर इसका सवाब और हिफ़ाज़त बहुत बड़ी है। Ghar Se Nikalte Waqt Ki Dua को याद करना और रोज़ पढ़ना हर मुसलमान मर्द, औरत और बच्चे के लिए आसान है।
इस्लाम में हर छोटे-बड़े काम के लिए दुआएं सिखाई गई हैं, ताके एक मुसलमान की ज़िंदगी का हर पल अल्लाह के ज़िक्र से जुड़ा रहे। घर से निकलना भी एक ऐसा ही मामूली मगर अहम लम्हा है, क्योंकि इसी लम्हे से इंसान की रोज़मर्रा की सरगर्मियां और उससे जुड़े ख़तरे भी शुरू होते हैं। यही वजह है कि नबी करीम ﷺ ने इस मौक़े के लिए एक ख़ास दुआ अपनी उम्मत को सिखाई, ताके हर मुसलमान अल्लाह की हिफ़ाज़त में अपने घर से निकले।
आज की तेज़-रफ़्तार ज़िंदगी में जहाँ हादसे, दुर्घटनाएं और परेशानियां बढ़ रही हैं, वहाँ Ghar Se Nikalte Waqt Ki Dua एक रूहानी ढाल की तरह काम करती है। यह दुआ न सिर्फ़ ज़बान से पढ़ी जाती है बल्कि दिल से अल्लाह पर भरोसा करने का एक ज़रिया भी है। इस लेख में यह दुआ अरबी, हिंदी, उर्दू और Roman English में दी गई है, ताके हर उम्र और हर पसंद का पाठक इसे आसानी से समझ सके और अपनी रोज़ की ज़िंदगी में शामिल कर सके।
Ghar Se Nikalte Waqt Ki Dua In Arabic
بِسْمِ اللَّهِ تَوَكَّلْتُ عَلَى اللَّهِ وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ
Ghar Se Nikalte Waqt Ki Dua In Roman English
Bismillahi, tawakkaltu ‘ala Allahi, wa la hawla wa la quwwata illa billah.
यह Roman English transliteration उन लोगों के लिए बहुत मददगार है जो अरबी स्क्रिप्ट नहीं पढ़ सकते मगर सही तलफ़्फ़ुज़ के साथ दुआ याद करना चाहते हैं।
Ghar Se Nikalte Waqt Ki Dua In Hindi
अल्लाह के नाम से मैं शुरू करता हूँ, मैंने अल्लाह पर भरोसा किया, और कोई ताक़त और कोई क़ुव्वत नहीं है सिवाय अल्लाह की मदद के।
Ghar Se Nikalte Waqt Ki Dua In Urdu
اللہ کے نام سے، میں نے اللہ پر بھروسہ کیا، اور کوئی طاقت اور کوئی قوت نہیں ہے سوائے اللہ کی مدد کے۔
Ghar Se Nikalte Waqt Ki Dua In Urdu बोलने और समझने वाले हज़रात भी ऊपर दिए गए उर्दू तर्जुमे से दुआ का मतलब आसानी से समझ सकते हैं।
Ghar Se Nikalte Waqt Ki Dua In English
“In the name of Allah, I place my trust in Allah. There is no power and no strength except with Allah.”
Ghar Se Nikalte Waqt Ki Dua Ka Tarjuma (शब्द दर शब्द)
| अरबी शब्द | Roman English | मतलब |
|---|---|---|
| بِسْمِ اللَّهِ | Bismillahi | अल्लाह के नाम से |
| تَوَكَّلْتُ | Tawakkaltu | मैंने भरोसा किया |
| عَلَى اللَّهِ | ‘ala Allahi | अल्लाह पर |
| وَلَا حَوْلَ | Wa la hawla | और न कोई ताक़त |
| وَلَا قُوَّةَ | Wa la quwwata | और न कोई क़ुव्वत |
| إِلَّا بِاللَّهِ | Illa billah | सिवाय अल्लाह की मदद के |
Disclaimer (अस्वीकरण): इस लेख में दी गई Ghar Se Nikalte Waqt Ki Dua से जुड़ी जानकारी सिर्फ़ इस्लामी शिक्षा और समझ बढ़ाने के मक़सद से पेश की गई है। अरबी मतन, तर्जुमा और तलफ़्फ़ुज़ को सहीह हदीस के हवाले (सुनन अबू दावूद व जामे तिर्मिज़ी) से एहतियात के साथ तैयार किया गया है, फिर भी पढ़ने और सिखाने से पहले किसी मुस्तनद आलिम या मुफ़्ती से तस्दीक़ ज़रूर कर लें। यह लेख किसी शरई फ़तवे का दर्जा नहीं रखता।
यह Ghar Se Nikalte Waqt Ki Dua Ka Tarjuma उन लोगों के लिए फ़ायदेमंद है जो दुआ का एक-एक लफ़्ज़ समझना चाहते हैं और उसकी गहराई को दिल से महसूस करना चाहते हैं। शब्द दर शब्द तर्जुमा पढ़ने से दुआ का मतलब ज़्यादा गहराई से समझ में आता है।
व्याख्या (Explanation)
यह दुआ सुनन अबू दावूद (हदीस 5095) और जामे तिर्मिज़ी (हदीस 3426) में हज़रत अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत की गई है। इमाम तिर्मिज़ी ने इस हदीस को हसन सहीह क़रार दिया है। हदीस में आता है कि जब भी कोई बंदा यह दुआ पढ़ कर घर से निकलता है, तो फ़रिश्ते उसका रास्ता छोड़ देते हैं और उससे कहा जाता है: “तुझे हिदायत मिल गई, तेरा काम पूरा हो गया, और तू महफ़ूज़ कर दिया गया।” शैतान भी इस दुआ की वजह से उस शख़्स से दूर हो जाता है।
इसके साथ साथ, हज़रत उम्मे सलमा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से एक तवील दुआ भी रिवायत होती है जो घर से निकलते वक़्त के लिए पढ़ी जा सकती है:
اللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ أَنْ أَضِلَّ أَوْ أُضَلَّ، أَوْ أَزِلَّ أَوْ أُزَلَّ، أَوْ أَظْلِمَ أَوْ أُظْلَمَ، أَوْ أَجْهَلَ أَوْ يُجْهَلَ عَلَيَّ
Allahumma inni a’udhu bika an adhilla aw udhalla, aw azilla aw uzalla, aw azlima aw uzlama, aw ajhala aw yujhala ‘alayya.
मतलब: “ऐ अल्लाह, मैं तेरी पनाह चाहता हूँ इस बात से कि मैं भटक जाऊँ या मुझे भटका दिया जाए, या मैं फिसल जाऊँ या मुझे फिसला दिया जाए, या मैं ज़ुल्म करूँ या मुझ पर ज़ुल्म किया जाए, या मैं नादानी करूँ या मुझसे नादानी की जाए।”
यह दुआ सुनन अबू दावूद (हदीस 5094), जामे तिर्मिज़ी (हदीस 3427) और सुनन इब्ने माजा में मौजूद है और इसे भी authentic माना जाता है। चाहो तो सिर्फ़ पहली छोटी दुआ पढ़ें या दोनों दुआओं को मिला कर पढ़ें, दोनों तरीक़े सहीह हदीस से साबित हैं।
इन दोनों दुआओं में जो सबसे अहम बात नज़र आती है, वो है “तवक्कुल” यानी अल्लाह पर भरोसा। जब इंसान बिस्मिल्लाह कह कर और अल्लाह पर तवक्कुल करते हुए घर से निकलता है, तो उसके दिल से डर और परेशानी दूर हो जाती है। उसे यक़ीन हो जाता है कि उसकी हिफ़ाज़त करने वाला अल्लाह है, न कि सिर्फ़ उसकी अपनी ताक़त या होशियारी। यही वजह है कि सहाबा-ए-किराम भी इस दुआ को बहुत अहमियत देते थे और अपने घर वालों को भी इसे पढ़ने की ताक़ीद करते थे।
उलमा का कहना है कि जब कोई शख़्स Ghar Se Nikalte Waqt Ki Dua को समझ कर और दिल की गहराई से पढ़ता है, तो उसके अंदर एक रूहानी सुकून पैदा होता है। यह सुकून उसे दिन भर की मशक़्क़त और परेशानियों का सामना करने के लिए तैयार करता है, क्योंकि उसे मालूम होता है कि उसका मामला अल्लाह के सुपुर्द है।
कब पढ़ें यह दुआ (When To Read This Dua)
Ghar Se Nikalte Waqt Ki Dua घर का दरवाज़ा पार करने से पहले या दरवाज़े पर खड़े हो कर पढ़नी चाहिए। यह दुआ रोज़, हर बार घर से बाहर निकलते वक़्त पढ़ी जा सकती है — चाहे काम पर जाना हो, बाज़ार जाना हो, सफ़र पर निकलना हो या कोई भी छोटी-बड़ी ज़रूरत हो। बच्चों को भी बचपन से यह दुआ सिखानी चाहिए ताके उनकी आदत बन जाए।
बेहतर यह है कि इंसान दरवाज़ा खोलते वक़्त ही यह दुआ शुरू कर दे और घर से पूरी तरह बाहर आने तक इसे मुकम्मल कर ले। नमाज़ के लिए मस्जिद जाते वक़्त, दफ़्तर या दुकान के लिए निकलते वक़्त, बच्चों को स्कूल छोड़ने जाते वक़्त — हर मौक़े पर यह दुआ पढ़ी जा सकती है। कुछ उलमा यह भी कहते हैं कि अगर इंसान जल्दी में हो और पूरी दुआ याद न हो, तो कम से कम “बिस्मिल्लाह” कह कर घर से निकले, ताके सुन्नत का कुछ हिस्सा अदा हो जाए। मगर बेहतर यही है कि पूरी दुआ याद कर के रोज़ाना अमल में लाई जाए।
इस दुआ के फ़ायदे (Benefits of Ghar Se Nikalte Waqt Ki Dua)
- Ghar Se Nikalte Waqt Ki Dua पढ़ने से अल्लाह की तरफ़ से हिफ़ाज़त मिलती है।
- फ़रिश्ते उस शख़्स के साथ हो जाते हैं जो यह दुआ पढ़ कर निकलता है।
- शैतान उस इंसान से दूर हो जाता है जो बिस्मिल्लाह और तवक्कुल के साथ घर से निकलता है।
- दिल में अल्लाह पर भरोसा (तवक्कुल) मज़बूत होता है।
- दिन की शुरुआत अल्लाह के नाम से होने की वजह से सुकून और बरकत मिलती है।
- रास्ता चलते वक़्त हादसों और मुसीबतों से हिफ़ाज़त की उम्मीद रहती है।
- छोटी सी दुआ होने की वजह से हर उम्र का इंसान इसे आसानी से याद कर सकता है।
- यह दुआ नबी करीम ﷺ की सुन्नत पर अमल करने का ज़रिया बनती है, जिससे रोज़ाना सवाब मिलता है।
- घर के हर फ़र्द के इस दुआ पर अमल करने से पूरे घराने में बरकत और हिफ़ाज़त का माहौल बनता है।
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निष्कर्ष (Conclusion)
Ghar Se Nikalte Waqt Ki Dua एक छोटी सी सुन्नत है जो हर मुसलमान की ज़िंदगी में बरकत और हिफ़ाज़त ला सकती है। रोज़ इस दुआ को अमल में लाना अल्लाह पर तवक्कुल को मज़बूत करता है और शैतान के वसवसे से दूर रखता है।
यह दुआ सिर्फ़ अल्फ़ाज़ का मजमूआ नहीं है, बल्कि यह एक मुसलमान की सोच और तर्ज़-ए-ज़िंदगी को भी बदल देती है। जब इंसान हर सुबह अल्लाह का नाम ले कर और उस पर भरोसा कर के घर से निकलता है, तो उसके दिल में ख़ौफ़ की जगह सुकून आ जाता है और वह अपने काम ज़्यादा इत्मिनान और यक़ीन के साथ करता है। यह छोटी दुआ बड़े-बड़े मसाइल में भी अल्लाह की मदद और हिफ़ाज़त का ज़रिया बन जाती है।
इस दुआ को अरबी, Roman English, हिंदी और उर्दू में याद कर लेना बहुत आसान है, और इसका सवाब हर उस लम्हे के लिए मिलता रहता है जब इंसान इसे पढ़ कर घर से बाहर निकलता है। बेहतर यह है कि हर मुसलमान इस Ghar Se Nikalte Waqt Ki Dua को अपनी रोज़ाना ज़िंदगी का हिस्सा बना ले और अपने बच्चों, घर वालों और दोस्तों को भी इसे पढ़ने की तरग़ीब दे, ताके पूरा घराना अल्लाह की हिफ़ाज़त और रहमत के साये में रहे।
? अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. घर से निकलते वक़्त कौनसी दुआ पढ़नी चाहिए?
Ghar Se Nikalte Waqt Ki Dua In Roman English यह है: “Bismillahi, tawakkaltu ‘ala Allahi, wa la hawla wa la quwwata illa billah.” यह दुआ सुनन अबू दावूद और जामे तिर्मिज़ी में सहीह सनद से मौजूद है।
2. घर से निकलते वक़्त की दुआ किस हदीस में है?
यह दुआ सुनन अबू दावूद (5095) और जामे तिर्मिज़ी (3426) में हज़रत अनस बिन मालिक (रज़ि.) से रिवायत है, जिसे इमाम तिर्मिज़ी ने हसन सहीह कहा है।
3. क्या यह दुआ सिर्फ़ मर्द पढ़ सकते हैं या औरत भी?
यह दुआ तमाम मुसलमान मर्द और औरत, छोटे और बड़े, सब पढ़ सकते हैं। इसमें कोई फ़र्क़ नहीं है।
4. घर से निकलते वक़्त की दुआ का सवाब क्या है?
हदीस में बताया गया है कि यह दुआ पढ़ने वाले को हिदायत मिलती है, उसका काम पूरा होता है, और वो महफ़ूज़ कर दिया जाता है, और शैतान उससे दूर हो जाता है।
5. क्या बच्चों को यह दुआ सिखानी चाहिए?
हाँ, बच्चों को बचपन से Ghar Se Nikalte Waqt Ki Dua In Hindi या Ghar Se Nikalte Waqt Ki Dua In Urdu, जो भी उनके लिए आसान हो, सिखानी चाहिए ताके उन्हें घर से निकलते वक़्त अल्लाह का नाम लेने की आदत पड़ जाए।
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