अज़ान सुनना और उसका जवाब देना इस्लाम में बहुत बड़ी सुन्नत है। जब मस्जिद से मुअज्ज़िन की आवाज़ आती है, तो हर मुसलमान पर यह मुस्तहब (पसंदीदा अमल) है कि वह अज़ान के अल्फाज़ को दोहराए और उसके बाद दुआ पढ़े।
नबी करीम ﷺ ने फरमाया:
“जो शख्स अज़ान सुनकर यह दुआ पढ़े, उसके लिए कयामत के दिन मेरी शफाअत (सिफारिश) हलाल हो जाएगी।”
Azan Ke Baad Ki Dua In Hindi जानना हर मुसलमान के लिए ज़रूरी है चाहे वो हिंदी बोलने वाले हों या उर्दू। यह दुआ बहुत मुख्तसर (छोटी) है, मगर इसकी फजीलत बेहद अज़ीम है।
Azan Ke Baad Ki Dua – अज़ान के बाद की दुआ
अज़ान ख़त्म होने के फौरन बाद पहले दरूद शरीफ पढ़ें, फिर यह दुआ पढ़ें:
دعاء بعد الأذان – Azan Ke Baad Ki Dua In Arabic
اَللّٰهُمَّ رَبَّ هٰذِهِ الدَّعْوَةِ التَّامَّةِ
وَالصَّلَاةِ الْقَائِمَةِ
اٰتِ مُحَمَّدَنِ الْوَسِيْلَةَ وَالْفَضِيْلَةَ
وَابْعَثْهُ مَقَامًا مَّحْمُوْدَنِ الَّذِيْ وَعَدْتَّهٗ
Azan Ke Baad Ki Dua In Roman English (Transliteration)
Allahumma Rabba Haazihid-Da’watit-Taammah, Was-Salatil-Qaa’imah, Aati Muhammadanil-Waseelata Wal-Fadeelah, Wab-As’hu Maqaamam-Mahmoodanil-Lazee Wa’adtah.
(कुछ रिवायतों में आखिर में “इन्नका ला तुखलिफुल मीआद” भी आता है, यह पढ़ना भी जायज़ है।)
Azan Ke Baad Ki Dua In Hindi (हिंदी तर्जुमा)
“ऐ अल्लाह! इस कामिल (पूरी) पुकार के और कायम होने वाली नमाज़ के रब! मुहम्मद ﷺ को वसीला और फजीलत अता फरमा, और उन्हें उस ‘मकाम-ए-महमूद’ पर खड़ा कर जिसका तूने उनसे वादा किया है।”
Azan Ke Baad Ki Dua In Urdu (اردو ترجمہ)
“اے اللہ! اس کامل پکار کے اور قائم ہونے والی نماز کے رب! محمد ﷺ کو وسیلہ اور فضیلت عطا فرما، اور انہیں اس مقامِ محمود پر کھڑا کر جس کا تو نے ان سے وعدہ کیا ہے۔“
Azan Ke Baad Ki Dua In English (English Translation)
“O Allah! Lord of this perfect call and of the regular prayer which is going to be established! Grant Muhammad ﷺ the right of intercession and superiority, and raise him to the highest place in Paradise which You have promised him.”
Azan Ke Baad Ki Dua With Meaning – शब्दों का मतलब
| अरबी शब्द | हिंदी मतलब |
|---|---|
| اَللّٰهُمَّ | ऐ अल्लाह |
| رَبَّ هٰذِهِ الدَّعْوَةِ | इस पुकार के रब |
| التَّامَّةِ | कामिल / पूरी |
| وَالصَّلَاةِ الْقَائِمَةِ | और कायम होने वाली नमाज़ |
| الْوَسِيْلَةَ | वसीला (जन्नत का सबसे ऊँचा दर्जा) |
| وَالْفَضِيْلَةَ | और फजीलत (बुलंद मक़ाम) |
| مَقَامًا مَّحْمُوْدًا | मकाम-ए-महमूद (तारीफ किया हुआ मक़ाम) |
| وَعَدْتَّهٗ | जिसका तूने वादा किया है |
Disclaimer (अस्वीकरण): इस वेबसाइट पर दी गई तमाम इस्लामी दुआएँ, उनके तर्जुमे और मतलब सिर्फ दीनी मालूमात (धार्मिक जानकारी) के मकसद से पेश किए गए हैं।
Azan Ke Baad Ki Dua With Tarjuma – तफसील के साथ
“दावत-ए-ताम्मा” का मतलब क्या है?
“दावत-ए-ताम्मा” यानी “कामिल पुकार” अज़ान को इसलिए कामिल पुकार कहते हैं क्योंकि यह सिर्फ नमाज़ के लिए बुलावा नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ, कामयाबी की तरफ और सच्चे दीन की तरफ बुलावा है।
“वसीला” क्या है?
वसीला जन्नत का वह सबसे ऊँचा और बेहतरीन मक़ाम है जो सिर्फ एक बंदे को मिलेगा। नबी करीम ﷺ ने फरमाया कि वह मक़ाम मुझे मिलेगा। इसलिए हम दुआ करते हैं कि अल्लाह उन्हें यह मक़ाम अता फरमाए।
“मकाम-ए-महमूद” क्या है?
यह वह मक़ाम है जहाँ पर कयामत के दिन नबी ﷺ अल्लाह की इजाज़त से तमाम उम्मत के लिए शफाअत (सिफारिश) करेंगे। पूरी खलकत उस दिन उनकी तारीफ करेगी, इसीलिए इसे “मकाम-ए-महमूद” कहते हैं।
अज़ान का जवाब देने का सही तरीका
Azan Ke Baad Ki Dua पढ़ने से पहले अज़ान के दौरान उसका जवाब देना भी सुन्नत है। नीचे सही तरीका दिया गया है:
| मुअज्ज़िन क्या कहे | सुनने वाला क्या जवाब दे |
|---|---|
| अल्लाहु अकबर | अल्लाहु अकबर |
| अश-हदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाह | अश-हदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाह |
| अश-हदु अन्ना मुहम्मदुर रसूलुल्लाह | अश-हदु अन्ना मुहम्मदुर रसूलुल्लाह |
| हय्या अलस-सलाह | ला हौला वला कुव्वता इल्ला बिल्लाह |
| हय्या अलल-फलाह | ला हौला वला कुव्वता इल्ला बिल्लाह |
| अल्लाहु अकबर | अल्लाहु अकबर |
| ला इलाहा इल्लल्लाह | ला इलाहा इल्लल्लाह |
फज्र की अज़ान में: जब मुअज्ज़िन “अस-सलातु खैरुम मिनन-नोम” कहे (नमाज़ नींद से बेहतर है), तो जवाब में कहें: “सदक़-त व बरर-त” (तूने सच कहा और ठीक कहा)।
यह दुआ कब पढ़ें? (Azan Ke Baad Ki Dua Kab Padhe)
Azan Ke Baad Ki Dua का सही वक्त यह है:
- अज़ान पूरी तरह खत्म होने के बाद
- पहले दरूद शरीफ पढ़ें (कोई भी दरूद जैसे दरूद इब्राहीम)
- फिर यह दुआ पढ़ें
- दुआ पढ़ने के बाद अपनी ज़रूरत की दुआ भी माँग सकते हैं यह वक्त दुआओं की कबूलियत का वक्त है
नबी ﷺ ने फरमाया:
“अज़ान और इकामत के बीच की दुआ रद नहीं की जाती।” (तिर्मिज़ी: 212)
Azan Ke Baad Ki Dua के फायदे और फजीलत
1. नबी ﷺ की शफाअत नसीब होती है
सहीह बुखारी (हदीस: 614) में है कि जो शख्स अज़ान सुनकर यह दुआ पढ़े, उसके लिए कयामत के दिन नबी ﷺ की शफाअत हलाल हो जाती है। यह बहुत बड़ी नेमत है।
2. दुआओं की कबूलियत का वक्त
अज़ान और इकामत के दरमियान दुआएँ कबूल होती हैं। इसलिए Azan Ke Baad Ki Dua पढ़ने के बाद अपनी ज़रूरतें भी माँगें।
3. अल्लाह की रहमत नाज़िल होती है
जब अज़ान होती है तो शैतान भाग जाता है और रहमत के दरवाजे खुल जाते हैं। उस वक्त दुआ माँगना बेहद मुबारक अमल है।
4. सुन्नत पर अमल का सवाब
यह दुआ नबी करीम ﷺ की सिखाई हुई सुन्नत है। इस पर अमल करने से बेशुमार सवाब मिलता है और अल्लाह का करीबी बंदा बनने का मौका मिलता है।
5. नमाज़ की तरफ दिल का रुझान
Azan Ke Baad Ki Dua पढ़ने से दिल में नमाज़ की अहमियत और नबी ﷺ की मुहब्बत पैदा होती है।
ज़रूरी बातें
- यह दुआ हर नमाज़ की अज़ान के बाद पढ़ी जाए फज्र, ज़ुहर, अस्र, मग़रिब और इशा
- जुमे की अज़ान के बाद भी यही दुआ पढ़ें
- दुआ पढ़ते वक्त ध्यान और खुशू के साथ पढ़ें
- अगर अज़ान सुनते वक्त कोई काम कर रहे हों तो रुककर अज़ान का जवाब देना बेहतर है
- Azan Ke Baad Ki Dua In Arabic याद करना सबसे अफज़ल है, लेकिन हिंदी या उर्दू में मतलब जानकर पढ़ना भी सवाब का काम है
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निष्कर्ष (Conclusion)
Azan Ke Baad Ki Dua In Hindi जानना और उसे अपनी ज़िंदगी में शामिल करना हर मुसलमान के लिए बेहद ज़रूरी है। यह छोटी-सी दुआ नबी करीम ﷺ की सुन्नत है और इसकी फजीलत बहुत अज़ीम है। अज़ान का जवाब देना, दरूद पढ़ना और फिर Azan Ke Baad Ki Dua पढ़ना यह तीनों मिलकर उस शख्स के लिए नबी ﷺ की शफाअत का ज़रिया बनते हैं।
Azan Ke Baad Ki Dua In Arabic, Azan Ke Baad Ki Dua In Urdu, Azan Ke Baad Ki Dua In English जिस भी ज़बान में आप पढ़ें, कोशिश करें कि इसका मतलब (Azan Ke Baad Ki Dua With Meaning) भी समझें ताकि दिल से दुआ निकले।
अल्लाह से दुआ है कि वह हम सबको इस सुन्नत पर अमल करने की तौफीक अता फरमाए और कयामत के दिन नबी ﷺ की शफाअत नसीब फरमाए। आमीन।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. Azan Ke Baad Ki Dua कौन सी है?
A. अज़ान के बाद पढ़ी जाने वाली दुआ यह है: “अल्लाहुम्मा रब्बा हाज़िहिद दावतित ताम्मा, वस्सलातिल काइमा, आति मुहम्मद-निल वसीलता वल फज़ीला, वब-अस्हु मकामम महमूदा-निल्लज़ी व-अत्तह।” यह दुआ सहीह बुखारी में वारिद है।
Q2. क्या Azan Ke Baad Ki Dua हर नमाज़ के बाद पढ़नी चाहिए?
A. जी हाँ, यह दुआ हर नमाज़ की अज़ान के बाद पढ़नी चाहिए। पाँचों नमाज़ों और जुमे की अज़ान के बाद यह दुआ पढ़ना सुन्नत है।
Q3. अज़ान के बाद दुआ पढ़ने का क्या फायदा है?
A. हदीस (सहीह बुखारी) के मुताबिक जो यह दुआ पढ़ता है, उसके लिए कयामत के दिन नबी करीम ﷺ की शफाअत वाजिब हो जाती है। इससे बड़ी फजीलत और क्या हो सकती है।
Q4. “वसीला” और “मकाम-ए-महमूद” में क्या फर्क है?
A. “वसीला” जन्नत का सबसे ऊँचा मक़ाम है जो नबी ﷺ को मिलेगा। “मकाम-ए-महमूद” वह मक़ाम है जहाँ से नबी ﷺ कयामत के दिन शफाअत करेंगे। दोनों एक ही बात की तरफ इशारा करते हैं नबी ﷺ का सबसे ऊँचा और तारीफ किया हुआ दर्जा।
Q5. क्या अज़ान के वक्त बात करना ठीक है?
A. अज़ान के वक्त खामोश रहना और जवाब देना मुस्तहब (पसंदीदा) है। बिना ज़रूरत दुनिया की बातें करना अच्छा नहीं माना जाता।
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