Asar Ki Namaz Ki Rakat की सही जानकारी हर मुसलमान के लिए ज़रूरी है, क्योंकि यह नमाज़ इस्लाम के पाँच फर्ज़ अरकान में से एक है। असर दिन का चौथा वक्त है और Asar Ki Namaz Ka Waqt दोपहर के बाद शुरू होकर सूरज डूबने से पहले तक रहता है।
बहुत से लोगों के मन में यह सवाल होता है कि Asar Ki Namaz Me Kitni Rakat Hoti Hai कुल कितनी रकातें हैं, कितनी सुन्नत हैं और कितनी फर्ज़। यहाँ Asar Ki Namaz Ki Rakat की पूरी जानकारी दी गई है, साथ ही Asar Ki Namaz Ka Tarika भी सरल शब्दों में बताया गया है।
Asar Ki Namaz Me Kitni Rakat Hoti Hai?
Asar Ki Namaz Rakat की कुल संख्या 8 रकात है जिनमें से
| रकात का प्रकार | रकात संख्या |
|---|---|
| सुन्नत (गैर-मुअक्कदा) | 4 रकात |
| फर्ज़ | 4 रकात |
| कुल | 8 रकात |
महत्वपूर्ण बात: असर की नमाज़ में कोई सुन्नत मुअक्कदा नहीं है। पहले की 4 रकातें सुन्नत गैर-मुअक्कदा हैं यानी इन्हें पढ़ना अच्छा है, लेकिन छोड़ने पर कोई गुनाह नहीं।
Asar Ki Namaz Ka Waqt (समय)
Asar Ki Namaz Ka Time दोपहर के बाद यानी ज़वाल के बाद शुरू होता है। हर इलाके और मौसम के हिसाब से यह समय अलग-अलग होता है।
- शुरुआत: हर चीज़ की परछाईं उसकी लंबाई से दोगुनी हो जाने के बाद
- आखिरी वक्त (मुस्तहब): सूरज पीला पड़ने से पहले
- आखिरी वक्त (जाइज़): सूरज डूबने से पहले तक
रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
“जो असर की नमाज़ छोड़ दे, उसका अमल बर्बाद हो गया।”
(सहीह बुखारी)
यह हदीस असर की नमाज़ की अहमियत को ज़ाहिर करती है।
Asar Ki Namaz Ki Rakat — विस्तृत विवरण
पहली 4 रकात — सुन्नत गैर-मुअक्कदा
ये 4 रकातें सुन्नत हैं जो नबी करीम ﷺ ने खुद पढ़ीं और पढ़ने की तरगीब दी। हज़रत अली رضي الله عنه से रिवायत है कि नबी ﷺ असर से पहले 4 रकात पढ़ते थे।
“नबी ﷺ असर से पहले चार रकात पढ़ते थे।”
(सुनन तिर्मिज़ी, हदीस: 429)
इन्हें पढ़ना बाइसे-सवाब है।
आखिरी 4 रकात — फर्ज़
असर की नमाज़ की 4 रकात फर्ज़ हैं। ये हर मुसलमान पर वाजिब हैं। इन्हें छोड़ना गुनाह है।
Asar Ki Namaz Ka Tarika (तरीका)
4 रकात सुन्नत गैर-मुअक्कदा का तरीका
पहली और दूसरी रकात:
- नियत बाँधें — “मैं नियत करता/करती हूँ 4 रकात सुन्नत असर की, वास्ते अल्लाह के, रुख मेरा काबे की तरफ।”
- तकबीरे तहरीमा — “अल्लाहु अकबर” कहते हुए हाथ बाँधें।
- सना पढ़ें — “सुबहानका अल्लाहुम्मा व बिहम्दिका व तबारकस्मुका व ता’आला जद्दुका व ला इलाहा गैरुक।”
- ता’ऊज़ और तस्मिया — “अउज़ु बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम, बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम।”
- सूरह फातिहा पढ़ें।
- कोई भी सूरह मिलाएँ।
- रुकू करें और तस्बीहात पढ़ें।
- सजदा करें — दो बार।
- दूसरी रकात में यही तरीका दोहराएँ।
- दूसरी रकात के बाद पहला क़ादा (तशह्हुद) पढ़ें।
- तीसरी और चौथी रकात में सिर्फ सूरह फातिहा पढ़ें।
- चौथी रकात के बाद आखिरी क़ादा में तशह्हुद, दरूद और दुआ मासूरा पढ़ें।
- सलाम फेरें — दाईं और बाईं तरफ।
4 रकात फर्ज़ का तरीका
4 रकात फर्ज़ का तरीका भी सुन्नत जैसा ही है। कुछ अंतर:
- नियत: “मैं नियत करता/करती हूँ 4 रकात फर्ज़ असर की, वास्ते अल्लाह के, रुख मेरा काबे की तरफ।”
- तीसरी और चौथी रकात में सूरह फातिहा के साथ कोई और सूरह नहीं मिलाई जाती (हनफी मसलक में)।
- बाकी सब वैसा ही।
असर की नमाज़ में पढ़ी जाने वाली दुआएँ
تشهد — तशह्हुद (अत्तहिय्यात)
Arabic:
التَّحِيَّاتُ لِلَّهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ، السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ، السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَى عِبَادِ اللَّهِ الصَّالِحِينَ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
Transliteration:
At-Tahiyyatu Lillahi was-Salawatu wat-Tayyibatu, As-Salamu ‘Alaika Ayyuhan-Nabiyyu wa Rahmatullahi wa Barakatuh, As-Salamu ‘Alaina wa ‘ala ‘Ibadillahis-Salihin, Ash-hadu An La Ilaha Illallahu wa Ash-hadu Anna Muhammadan ‘Abduhu wa Rasuluh.
हिंदी अर्थ: सब तअज़ीमें, सब नमाज़ें और सब पाकीज़ा चीज़ें अल्लाह के लिए हैं। ऐ नबी! आप पर सलाम हो और अल्लाह की रहमत और बरकात हो। सलाम हो हम पर और अल्लाह के नेक बंदों पर। मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई इलाह नहीं और मुहम्मद ﷺ उनके बंदे और रसूल हैं।
दरूद इब्राहीम
Arabic:
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا صَلَّيْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ، اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا بَارَكْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ وَعَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
Transliteration:
Allahumma Salli ‘ala Muhammadin wa ‘ala Aali Muhammadin, Kama Sallaita ‘ala Ibrahima wa ‘ala Aali Ibrahima, Innaka Hamidun Majid. Allahumma Barik ‘ala Muhammadin wa ‘ala Aali Muhammadin, Kama Barakta ‘ala Ibrahima wa ‘ala Aali Ibrahima, Innaka Hamidun Majid.
हिंदी अर्थ: ऐ अल्लाह! रहमत नाज़िल फरमा हज़रत मुहम्मद ﷺ पर और उनकी आल पर, जैसे तूने रहमत नाज़िल की हज़रत इब्राहीम ؑ पर और उनकी आल पर। बेशक तू तारीफ के लायक और बड़ी शान वाला है।
Arabic:
اللَّهُمَّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي ظُلْمًا كَثِيرًا، وَلَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنْتَ، فَاغْفِرْ لِي مَغْفِرَةً مِنْ عِنْدِكَ وَارْحَمْنِي، إِنَّكَ أَنْتَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
Transliteration:
Allahumma Inni Zalamtu Nafsi Zulman Kaseera, Wala Yaghfirudh-dhunuba Illa Anta, Faghfirli Maghfiratan Min ‘Indika Warhamni, Innaka Antal-Ghafurur-Rahim.
हिंदी अर्थ: ऐ अल्लाह! मैंने अपने ऊपर बड़ा ज़ुल्म किया है और गुनाहों को तेरे सिवा कोई नहीं बख्श सकता। तू मुझे अपनी तरफ से मगफिरत अता फरमा और मुझ पर रहम कर। बेशक तू बड़ा बख्शने वाला, मेहरबान है।
Disclaimer: यह लेख सिर्फ इस्लामी मालूमात और तालीम के मकसद से लिखा गया है। इसमें दी गई मालूमात मुस्तनद इस्लामी मसादिर और किताबों के हवाले से ली गई है। किसी भी दीनी मसले में अपने नज़दीकी आलिम या मुफ्ती से रुजू करना ज़रूरी है।
रुकू और सजदे की तस्बीहात
रुकू में:
Arabic: سُبْحَانَ رَبِّيَ الْعَظِيمِ
Transliteration: Subhana Rabbiyal Azeem
अर्थ: मेरा महान रब पाक है।
(कम से कम 3 बार)
सजदे में:
Arabic: سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَى
Transliteration: Subhana Rabbiyal A’la
अर्थ: मेरा बलंद रब पाक है।
(कम से कम 3 बार)
Asar Ki Namaz Ki Fazilat (फ़ज़ीलत)
कुरआन करीम में अल्लाह तआला ने असर की नमाज़ का खास ज़िक्र किया है:
حَافِظُوا عَلَى الصَّلَوَاتِ وَالصَّلَاةِ الْوُسْطَىٰ
“नमाज़ों की हिफाज़त करो, खासकर बीच वाली नमाज़ की।”
(सूरह बकरा: 238)
अक्सर मुफस्सिरीन का मानना है कि “सलातुल-वुस्ता” से मुराद असर की नमाज़ है।
फ़ज़ीलत से जुड़ी हदीस:
रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
“जिसने सूरज डूबने से पहले असर की एक रकात पा ली, उसकी असर की नमाज़ हो गई।”
(सहीह बुखारी व मुस्लिम)
असर की नमाज़ की अहमियत
असर की नमाज़ को इस्लाम में बेहद ज़रूरी माना गया है। कई बार दुनियावी मसरूफियत की वजह से लोग इसे भूल जाते हैं। हदीस में आया है कि जो शख्स असर की नमाज़ कज़ा कर दे, गोया उसके घर वाले और माल सब छिन गए।
इसीलिए हर मुसलमान को चाहिए कि Asar Ki Namaz Ka Waqt होते ही नमाज़ की तैयारी करे और उसे वक्त पर अदा करे।
असर की नमाज़ न पढ़ने का नुकसान
नबी ﷺ ने फरमाया:
“जिसकी असर की नमाज़ छूट गई, गोया उसके घरवाले और माल सब बर्बाद हो गए।”
(सहीह बुखारी, हदीस: 552)
यह हदीस साफ दर्शाती है कि Asar Ki Namaz को किसी भी हाल में नहीं छोड़ना चाहिए।
Asar Ki Namaz Ka Time — अलग-अलग मौसम में
हर मौसम में Asar Ki Namaz Ka Waqt अलग हो सकता है। इसे जानने के लिए स्थानीय नमाज़ के औकात का जदवल देखना ज़रूरी है।
- गर्मियों में: दोपहर बाद लगभग 3:00 से 4:00 बजे के बीच शुरू होता है
- सर्दियों में: लगभग 2:00 से 3:00 बजे के बीच शुरू होता है
- समाप्ति: हमेशा सूरज डूबने से पहले
Asar Ki Namaz Ki Rakat का सारांश
| वक्त | रकात का प्रकार | रकात |
|---|---|---|
| पहले | सुन्नत गैर-मुअक्कदा | 4 |
| बाद में | फर्ज़ | 4 |
| कुल | 8 |
असर की नमाज़ से जुड़े ज़रूरी मसाइल
क्या औरतें भी असर की नमाज़ पढ़ें?
हाँ, मर्दों और औरतों दोनों पर असर की नमाज़ फर्ज़ है। तरीका एक जैसा है, फर्क सिर्फ यह है कि औरतें थोड़ा सिमटकर नमाज़ पढ़ती हैं।
अगर असर की नमाज़ क़ज़ा हो जाए तो?
अगर वक्त निकल जाए तो जल्द से जल्द क़ज़ा अदा करें। क़ज़ा नमाज़ का तरीका वही है 4 रकात फर्ज़।
क्या सुन्नत रकातें ज़रूरी हैं?
असर की सुन्नतें “गैर-मुअक्कदा” हैं। इन्हें पढ़ना बेहतर है लेकिन छोड़ने पर गुनाह नहीं।
असर की नमाज़ और मलाइका (फरिश्तों) का आना
असर की नमाज़ की एक खास फ़ज़ीलत यह है कि इस वक्त फरिश्ते बदलते हैं। नबी करीम ﷺ ने फरमाया:
“फजर और असर की नमाज़ों में फरिश्ते जमा होते हैं। जब फजर की नमाज़ पढ़ने वाले फरिश्ते आते हैं तो रात के फरिश्ते ऊपर जाते हैं। अल्लाह तआला उनसे पूछता है हालाँकि वो सब जानता है ‘मेरे बंदों को किस हाल में छोड़कर आए?’ वो जवाब देते हैं: ‘हम उन्हें नमाज़ पढ़ते हुए छोड़कर आए और जब हम उनके पास गए तब भी वो नमाज़ पढ़ रहे थे।'”
(सहीह बुखारी व मुस्लिम)
यह हदीस बताती है कि असर के वक्त अल्लाह के फरिश्ते ख़ास तौर पर नाज़िल होते हैं और बंदों की नमाज़ की खबर अल्लाह के सामने पेश करते हैं।
असर की नमाज़ की सुन्नत — हदीस की रोशनी में
हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर رضي الله عنه से रिवायत है:
“नबी ﷺ ने फरमाया: जो शख्स असर से पहले चार रकात पढ़े, अल्लाह उस पर रहम फरमाए।”
(सुनन अबू दाऊद, सुनन तिर्मिज़ी)
इसीलिए उलमा ने Asar Ki Namaz से पहले 4 रकात सुन्नत पढ़ने को मुस्तहब क़रार दिया है।
वुज़ू — Asar Ki Namaz Ka Tarika शुरू करने से पहले
Asar Ki Namaz Ka Tarika जानने से पहले वुज़ू का दुरुस्त होना ज़रूरी है। बिना वुज़ू के नमाज़ सही नहीं होती।
वुज़ू का तरीका:
- नियत — दिल में वुज़ू की नियत करें।
- बिस्मिल्लाह कहें।
- दोनों हाथ कलाइयों तक तीन बार धोएँ।
- कुल्ली करें — तीन बार।
- नाक में पानी डालें और साफ करें — तीन बार।
- मुँह धोएँ — तीन बार।
- दाहिनी कोहनी तक हाथ धोएँ — तीन बार, फिर बाईं।
- सिर का मसह करें — एक बार।
- कानों का मसह करें।
- दाहिने पाँव की टखने तक धोएँ — तीन बार, फिर बाईं।
वुज़ू के बाद यह दुआ पढ़ें:
Arabic:
أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
Transliteration:
Ash-hadu An La Ilaha Illallahu Wahdahu La Sharika Lahu, Wa Ash-hadu Anna Muhammadan ‘Abduhu wa Rasuluh.
अर्थ: मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वो अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं, और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद ﷺ उसके बंदे और रसूल हैं।
नमाज़ की नियत — Asar Ki Namaz Ki Rakat के लिए
सुन्नत (4 रकात) की नियत:
“मैं नियत करता/करती हूँ चार रकात सुन्नत असर की, अल्लाह के लिए, रुख मेरा काबे शरीफ की तरफ।”
फर्ज़ (4 रकात) की नियत:
“मैं नियत करता/करती हूँ चार रकात फर्ज़ असर की, अल्लाह के लिए, रुख मेरा काबे शरीफ की तरफ।”
जमाअत के साथ फर्ज़ की नियत:
“मैं नियत करता/करती हूँ चार रकात फर्ज़ असर की, पीछे इस इमाम के, अल्लाह के लिए, रुख मेरा काबे शरीफ की तरफ।”
असर की नमाज़ और कुरआन की तिलावत
नमाज़ में सूरह फातिहा के बाद जो सूरहें मिलाई जा सकती हैं, कुछ मशहूर छोटी सूरहें:
- सूरह इखलास — बेहद मुख्तसर और ज़बरदस्त सूरह
- सूरह फलक
- सूरह नास
- सूरह कौसर
- सूरह आसर — वक्त की कसम और नेक अमल की याददिहानी
وَالْعَصْرِ إِنَّ الْإِنسَانَ لَفِي خُسْرٍ
“क़सम है असर की। बेशक इंसान घाटे में है।”
(सूरह आसर: 1-2)
इस सूरह का नाम ही “असर” है जो इस वक्त की अज़मत को ज़ाहिर करता है।
असर की नमाज़ के बाद की दुआ
Asar Ki Namaz के बाद अल्लाह की तसबीह और दुआ करना मुस्तहब है।
तसबीहात:
سُبْحَانَ اللَّهِ — Subhanallah — (33 बार)
الْحَمْدُ لِلَّهِ — Alhamdulillah — (33 बार)
اللَّهُ أَكْبَرُ — Allahu Akbar — (34 बार)
आयतुल-कुर्सी पढ़ें:
हर फर्ज़ नमाज़ के बाद आयतुल-कुर्सी पढ़ना बहुत ज़्यादा सवाब का काम है। हदीस में आया है:
“जो शख्स हर फर्ज़ नमाज़ के बाद आयतुल-कुर्सी पढ़े, उसके और जन्नत के दरमियान सिर्फ मौत का पर्दा है।”
(नसाई)
अलग-अलग मसलक में Asar Ki Namaz Ki Rakat
इस्लामी फिकह के चार मुख्य मसलक हैं। Asar Ki Namaz Ki Rakat की तादाद सभी में एक समान है:
| मसलक | सुन्नत | फर्ज़ | कुल |
|---|---|---|---|
| हनफी | 4 (गैर-मुअक्कदा) | 4 | 8 |
| शाफई | 4 (गैर-मुअक्कदा) | 4 | 8 |
| मालिकी | 4 (गैर-मुअक्कदा) | 4 | 8 |
| हंबली | 4 (गैर-मुअक्कदा) | 4 | 8 |
सभी मसलकों में Asar Ki Namaz Rakat की तादाद एक जैसी है कुल 8।
असर की नमाज़ — बच्चों को सिखाएँ
बच्चों को बचपन से ही नमाज़ की आदत डालनी चाहिए। नबी ﷺ का फरमान है:
“अपने बच्चों को सात साल की उम्र में नमाज़ का हुक्म दो।”
(सुनन अबू दाऊद)
Asar Ki Namaz Ka Tarika बच्चों को आसान तरीके से सिखाएँ:
- पहले वुज़ू का तरीका सिखाएँ
- फिर सूरह फातिहा याद कराएँ
- फिर छोटी-छोटी सूरहें याद कराएँ
- फिर तशह्हुद और दरूद सिखाएँ
- फिर पूरी नमाज़ का तरीका दिखाएँ
बच्चों को नमाज़ में साथ लेकर जाएँ यह सबसे बेहतर तरीका है।
Read Also: Salatul Tasbeeh Ki Namaz
निष्कर्ष (Conclusion)
Asar Ki Namaz इस्लाम के पाँच फर्ज़ नमाज़ों में से एक बेहद अहम नमाज़ है। Asar Ki Namaz Ki Rakat की कुल संख्या 8 है 4 सुन्नत गैर-मुअक्कदा और 4 फर्ज़।
हर मुसलमान को चाहिए कि Asar Ki Namaz Ka Waqt होते ही नमाज़ की तरफ तवज्जुह दे। दुनियावी मसरूफियत को नमाज़ से आगे न रखें। अल्लाह तआला ने खुद क़ुरआन में बीच वाली नमाज़ (जो असर है) की खास हिफाज़त का हुक्म दिया है।
Asar Ki Namaz Ka Tarika आसान है। बस नियत साफ हो, वुज़ू दुरुस्त हो और ऊपर दिए गए तरीके पर अमल हो।
अल्लाह तआला हम सबको पाँचों वक्त की नमाज़ वक्त पर अदा करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. Asar Ki Namaz Me Kitni Rakat Hoti Hai?
असर की नमाज़ में कुल 8 रकातें हैं 4 सुन्नत गैर-मुअक्कदा और 4 फर्ज़।
Q2. Asar Ki Namaz Ka Time कब होता है?
Asar Ki Namaz Ka Waqt दोपहर के बाद हर चीज़ की परछाईं दोगुनी होने के बाद शुरू होता है और सूरज डूबने से पहले खत्म होता है।
Q3. Asar Ki Namaz Ka Tarika क्या है?
पहले 4 रकात सुन्नत, फिर 4 रकात फर्ज़। सुन्नत और फर्ज़ दोनों का तरीका ऊपर विस्तार से दिया गया है।
Q4. क्या असर की नमाज़ में सुन्नत मुअक्कदा है?
नहीं। असर की नमाज़ में कोई सुन्नत मुअक्कदा नहीं है। पहले की 4 रकातें सुन्नत गैर-मुअक्कदा हैं।
Q5. अगर असर की नमाज़ का वक्त निकल जाए तो क्या करें?
जल्द से जल्द क़ज़ा अदा करें। 4 रकात फर्ज़ क़ज़ा पढ़ें।
Read More Duas Every Day At Islamic Dua Hub