Salatul Tasbeeh Ki Namaz इस्लाम की एक बेहद ख़ास नफ़्ल नमाज़ है जिसमें अल्लाह ﷻ की तस्बीह एक पाक और मुबारक कलिमा पूरी नमाज़ में कुल 300 मर्तबा पढ़ी जाती है। यह नमाज़ गुनाहों की मग़फ़िरत का एक अज़ीमुश्शान ज़रिया है।
रसूलुल्लाह ﷺ ने यह नमाज़ अपने प्यारे चचा हज़रत अब्बास इब्न अब्दुल मुत्तलिब (RA) को एक अनमोल तोहफ़े के तौर पर सिखाई थी। उन्होंने फ़रमाया कि अगर यह नमाज़ पढ़ोगे तो अल्लाह तुम्हारे पहले और पिछले, छोटे और बड़े, जानबूझकर और अनजाने में किए गए सभी गुनाहों को माफ़ कर देगा।
यह पाँच वक्त की फ़र्ज़ नमाज़ों में शामिल नहीं है यह एक नफ़्ल इबादत है जो इंसान अपनी ख़ुशी से अदा करता है। फिर भी इसका दर्जा बहुत बुलंद है, क्योंकि इसमें हर हरकत के साथ अल्लाह का ज़िक्र है रुकू में, सजदे में, क़ियाम में और जलसे में भी।
Salatul Tasbeeh Ki Namaz क्या है?
صلاة التسبيح (Salatul Tasbeeh) एक चार रकअत वाली नफ़्ल नमाज़ है। इसकी ख़ासियत यह है कि हर रकअत में एक मख़सूस तस्बीह को मख़सूस तरतीब के साथ 75 मर्तबा पढ़ा जाता है, इस तरह पूरी नमाज़ में यह तस्बीह 300 मर्तबा अदा की जाती है।
हदीस का हवाला
हज़रत अब्दुल्लाह इब्न अब्बास (RA) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने हज़रत अब्बास इब्न अब्दुल मुत्तलिब (RA) से फ़रमाया:
“ऐ अब्बास! ऐ मेरे चचा! क्या मैं तुम्हें दस ख़स्लतें न बताऊँ? अगर तुम उन पर अमल करो तो अल्लाह तुम्हारे सारे गुनाह माफ़ कर देगा पहले और पिछले, पुराने और नए, भूले हुए और जानते हुए किए गए, छोटे और बड़े, ज़ाहिर और छुपे हुए।”
(सुनन अबू दाऊद: 1297, सुनन इब्न माजा: 1386)
फिर आप ﷺ ने इस मुबारक नमाज़ का तरीक़ा बयान फ़रमाया।
उलेमा की राय
इस हदीस के बारे में उलेमा के दरमियान कुछ इख़्तिलाफ़ है:
- इमाम नवावी (शाफ़ई) और इमाम इब्न आबिदीन (हनफ़ी) — इस नमाज़ को फ़ज़ाइल के आमाल के लिए जाइज़ और मुस्तहब माना है।
- इमाम अहमद इब्न हंबल — हदीस को ज़ईफ़ कहा, मगर अपने मज़हब के उसूल के मुताबिक़ ज़ईफ़ हदीस से फ़ज़ीलत के आमाल जाइज़ माने।
- शैख़ अल-अल्बानी — इब्न अब्बास (RA) की रिवायत को सहीह लि-ग़यरिही क़रार दिया।
- इब्न तैमिया और इब्न उसैमीन — इस नमाज़ के मुस्तहब होने से इख़्तिलाफ़ किया।
ख़ुलासा: जो लोग हनफ़ी, शाफ़ई या मालिकी फ़िक़्ह को मानते हैं, उनके नज़रिए से Salatul Tasbeeh Ki Namaz पढ़ना फ़ज़ीलत का काम है बशर्ते सच्चे दिल और इख़्लास के साथ अदा की जाए।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल इस्लामी जानकारी और दीनी तालीम के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई अरबी दुआएँ, तरीक़े और हदीस के हवाले प्रामाणिक इस्लामी स्रोतों से लिए गए हैं, फिर भी पाठकों से विनम्र निवेदन है कि किसी भी धार्मिक मामले में अपने स्थानीय विश्वसनीय आलिम या मुफ़्ती साहब से राय ज़रूर लें।
Salatul Tasbeeh Ki Namaz की दुआ (मुख्य तस्बीह)
यह वह मुबारक तस्बीह है जो इस नफ़्ल नमाज़ में 300 मर्तबा पढ़ी जाती है:
अरबी मतन
سُبْحَانَ اللّٰهِ، وَالْحَمْدُ لِلّٰهِ، وَلَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ، وَاللّٰهُ أَكْبَرُ
Transliteration
Subhānallāhi, Walḥamdulillāhi, Wa Lā Ilāha Illallāhu, Wallāhu Akbar
हिंदी में मतलब (Meaning)
“अल्लाह पाक है, तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं, अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, और अल्लाह सबसे बड़ा है।”
हर रकअत में 75 बार यह तस्बीह पढ़ी जाती है और 4 रकअत में कुल मिलाकर 300 मर्तबा होती है।
Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ki Niyat
नियत (अरबी)
نَوَيْتُ أَنْ أُصَلِّيَ أَرْبَعَ رَكَعَاتٍ صَلَاةَ التَّسْبِيحِ لِلّٰهِ تَعَالٰى
Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ki Niyat हिंदी में इस तरह है:
नियत (हिंदी में)
“नियत की मैंने चार रकअत Salatul Tasbeeh की, वास्ते अल्लाह तआला के, मुँह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़ अल्लाहु अकबर।”
नियत (अंग्रेज़ी में)
“I intend to offer four rak’ahs of Salatul Tasbeeh for the sake of Allah ﷻ, facing the Qibla.”
Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ka Tarika In Hindi — क़दम दर क़दम
यह Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ka Tarika In Hindi में मुकम्मल तरीक़े से बयान किया जा रहा है:
पहली रकअत
क़दम 1 — नियत और तकबीर-ए-तहरीमा: नियत करके “अल्लाहु अकबर” कहकर नमाज़ शुरू करें।
क़दम 2 — सना + तस्बीह (15 मर्तबा): सना (सुबहानका अल्लाहुम्मा…) पढ़कर 15 बार यह तस्बीह पढ़ें:
سُبْحَانَ اللّٰهِ، وَالْحَمْدُ لِلّٰهِ، وَلَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ، وَاللّٰهُ أَكْبَرُ
क़दम 3 — सूरह फ़ातिहा + कोई सूरह + तस्बीह (10 मर्तबा): सूरह फ़ातिहा पढ़ें, फिर कोई सूरह (मसलन सूरह इख़्लास), फिर 10 बार तस्बीह पढ़ें।
क़दम 4 — रुकू + तस्बीह (10 मर्तबा): “अल्लाहु अकबर” कहकर रुकू में जाएँ। सुब्हान रब्बियल अज़ीम 3 बार पढ़कर 10 बार तस्बीह पढ़ें।
क़दम 5 — क़ौमह + तस्बीह (10 मर्तबा): रुकू से उठते हुए समि अल्लाहु लिमन हमिदह रब्बना लकल हम्द पढ़ें, फिर 10 बार तस्बीह पढ़ें।
क़दम 6 — पहला सजदा + तस्बीह (10 मर्तबा): “अल्लाहु अकबर” कहकर सजदे में जाएँ। सुब्हान रब्बियल अअला 3 बार पढ़कर 10 बार तस्बीह पढ़ें।
क़दम 7 — दो सजदों के बीच बैठना + तस्बीह (10 मर्तबा): दोनों सजदों के बीच बैठकर 10 बार तस्बीह पढ़ें।
क़दम 8 — दूसरा सजदा + तस्बीह (10 मर्तबा): फिर से सजदे में जाएँ। सुब्हान रब्बियल अअला 3 बार पढ़कर 10 बार तस्बीह पढ़ें।
✅ पहली रकअत में कुल = 75 तस्बीह
दूसरी, तीसरी और चौथी रकअत
यही तरतीब दूसरी, तीसरी और चौथी रकअत में भी अपनाएँ।
- दूसरी रकअत के बाद: पहला क़ादा — सिर्फ़ अत्तहिय्यात पढ़ें
- चौथी रकअत के बाद: दूसरा क़ादा — अत्तहिय्यात + दुरूद इब्राहीम + दुआ पढ़ें, फिर सलाम फेरकर नमाज़ मुकम्मल करें
✅ चार रकअत में कुल = 300 तस्बीह
Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ka Tarika In English (संक्षेप में)
Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ka Tarika In English में इस तरह है:
- Make Niyyah (intention) for four rak’ahs of Salatul Tasbeeh.
- Say Takbir-e-Tahreema — “Allahu Akbar.”
- Recite Sana, then say the Tasbeeh 15 times.
- Recite Surah Al-Fatiha + any Surah, then Tasbeeh 10 times.
- Go into Ruku — after ruku tasbeeh, recite the Tasbeeh 10 times.
- In Qawmah — recite the Tasbeeh 10 times.
- In First Sajdah — after sajdah tasbeeh, recite 10 times.
- While sitting between two Sajdahs — recite 10 times.
- In Second Sajdah — recite 10 times.
- Repeat this in all four rak’ahs.
✅ Per rak’ah = 75 Tasbeehs | Total in 4 rak’ahs = 300 Tasbeehs
Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ka Tarika In Urdu
Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ka Tarika In Urdu नीचे संक्षेप में दिया गया है:
صلاۃ التسبیح کی نماز کا طریقہ (اردو):
نیت، تکبیر تحریمہ، ثنا کے بعد 15 مرتبہ تسبیح پڑھیں۔ سورہ فاتحہ اور کوئی سورت پڑھ کر 10 مرتبہ، رکوع میں 10 مرتبہ، قومہ میں 10 مرتبہ، پہلے سجدے میں 10 مرتبہ، دو سجدوں کے درمیان 10 مرتبہ، دوسرے سجدے میں 10 مرتبہ۔ یہی ترتیب چاروں رکعتوں میں کل 300 تسبیح
Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ka Time
Salatul Tasbeeh Ki Namaz Ka Time कोई एक मख़सूस वक़्त नहीं है। यह एक नफ़्ल नमाज़ है जो मकरूह औक़ात के अलावा कभी भी पढ़ी जा सकती है।
बेहतरीन औक़ात
| वक़्त | वजह |
|---|---|
| इशा के बाद (रात का वक़्त) | क़द्र और ज़िक्र का अफ़ज़ल वक़्त |
| चाश्त का वक़्त | सुकून और इत्मिनान का वक़्त |
| ज़ुहर से पहले | दिन की इबादत का सिलसिला |
| रमज़ान की रातें | सवाब का अफ़ज़ल मौक़ा |
| शब-ए-बरात | अज़ीमुश्शान रात |
मकरूह औक़ात (जिन वक़्तों में न पढ़ें)
- फ़ज्र के बाद सूरज निकलने तक
- दोपहर (ज़वाल का वक़्त) — जब सूरज बिल्कुल सर पर हो
- अस्र के बाद सूरज डूबने तक
कितनी बार पढ़ें?
हदीस में फ़रमाया गया:
- हर रोज़ पढ़ो तो बेहतर
- हर हफ़्ते जुमे के दिन पढ़ो
- हर महीने में एक बार
- हर साल में एक बार
- अगर यह भी न हो, तो ज़िंदगी में कम से कम एक बार ज़रूर पढ़ो
(सुनन अबू दाऊद: 1297)
Salatul Tasbeeh Ki Namaz Benefits
Salatul Tasbeeh Ki Namaz Benefits बहुत बड़े हैं। यह सब फ़ायदे उसूल-ए-फ़िक़्ह के मुताबिक़ फ़ज़ाइल-उल-आमाल के ज़ुमरे में आते हैं:
1. गुनाहों की मग़फ़िरत
हदीस में साफ़ तौर पर आया है कि इस नमाज़ के ज़रिए अल्लाह तआला के पहले और पिछले, छोटे और बड़े, ज़ाहिर और छुपे सभी गुनाह माफ़ हो सकते हैं। यह अल्लाह की रहमत का एक ख़ास दरवाज़ा है।
2. क़ल्बी सुकून
300 बार की तस्बीह बंदे को दुनियावी फ़िक्रों से अलग करके अल्लाह की याद में डुबो देती है। यह ज़िक्र दिल में इत्मिनान पैदा करता है।
3. तक़वा और ख़ुशू में इज़ाफ़ा
हर पोस्चर में रुकू, सजदा, क़ियाम तस्बीह का पढ़ना इंसान को नमाज़ में ज़्यादा मुत्तवज्जह करता है। यह ख़ुशू को क़ायम रखने में मदद देता है।
4. ज़िक्र की आदत
यह नमाज़ इंसान को अल्लाह का ज़िक्र करने की आदत डालना सिखाती है। 300 तस्बीहात एक ही नमाज़ में यह क़ल्ब को अल्लाह की तरफ़ राग़िब करती हैं।
5. बरकत में इज़ाफ़ा
उलेमा ने लिखा है कि इस नमाज़ के पढ़ने से रिज़्क़ में बरकत, घर में सुकून और ज़िंदगी में आसानियाँ आती हैं बशर्ते नमाज़ सच्चे दिल से पढ़ी जाए।
6. रमज़ान में अफ़ज़ल सवाब
रमज़ान की रातें अगर इस नमाज़ में गुज़ारी जाएँ तो सवाब कई गुना ज़्यादा हो जाता है।
ज़रूरी बातें (Important Points)
- यह एक नफ़्ल नमाज़ है — फ़र्ज़, वाजिब या सुन्नत-ए-मुअक्कदा नहीं।
- इसका इख़्तिलाफ़ है — कुछ मुहद्दिसीन ने हदीस को ज़ईफ़ कहा, कुछ ने सहीह। मगर जुमहूर उलेमा ने इसे फ़ज़ीलत के आमाल के लिए जाइज़ रखा है।
- हिसाब का ख़याल रखें — उंगलियों या तस्बीह काउंटर से गिनते रहना जाइज़ है।
- यह नमाज़ जमाअत में नहीं — तन्हा पढ़ी जाए।
- कोई ख़ास सूरह नहीं — कोई भी सूरह पढ़ सकते हैं।
Read Also: Ayat E Karima
निष्कर्ष (Conclusion)
Salatul Tasbeeh Ki Namaz अल्लाह तआला की एक रहमत है बंदे के लिए एक ऐसा मौक़ा कि वह अपने तमाम गुनाहों की मग़फ़िरत तलब करे। रसूलुल्लाह ﷺ ने यह नमाज़ अपने प्यारे चचा को तोहफ़े में दी थी, और आज यह उम्मत के लिए एक नूरानी राह है।
चाहे रुक-रुककर पढ़ें, हफ़्ते में एक बार पढ़ें, या साल में एक बार मगर इस नमाज़ को ज़िंदगी से बिल्कुल दूर न करें। जब भी पढ़ें, इख़्लास के साथ पढ़ें सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए।
अल्लाह तआला हमारी Salatul Tasbeeh Ki Namaz क़बूल फ़रमाए, हमारे गुनाह माफ़ फ़रमाए, और हमारे दिल को अपनी याद से मुनव्वर रखे। आमीन।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: क्या Salatul Tasbeeh Ki Namaz रोज़ पढ़ी जा सकती है?
हाँ, अगर मुमकिन हो तो रोज़ पढ़ सकते हैं। हदीस में रोज़ाना पढ़ने की फ़ज़ीलत सबसे ज़्यादा बताई गई है।
Q2: अगर तस्बीह की गिनती भूल जाए तो क्या करें?
अगर गिनती भूल जाए तो जहाँ से याद हो वहाँ से शुरू कर लें। नियत और कोशिश पर अल्लाह सवाब देता है।
Q3: क्या औरत भी यह नमाज़ पढ़ सकती है?
बिल्कुल। यह नमाज़ मर्द और औरत दोनों के लिए जाइज़ है।
Q4: क्या रमज़ान में पढ़ सकते हैं?
हाँ, रमज़ान की रातें ख़ासकर लैलतुल क़द्र के क़रीब इस नमाज़ के लिए निहायत अफ़ज़ल हैं।
Q5: तस्बीह काउंटर इस्तेमाल करना कैसा है?
तस्बीह काउंटर या डिजिटल काउंटर इस्तेमाल करना जाइज़ है इससे ध्यान और हिसाब दोनों बराबर रहते हैं।
🤲 Read More Duas Every Day At Islamic Dua Hub