Dawat Khane Ki Dua | दावत खाने की दुआ – अरबी, हिंदी, उर्दू और इंग्लिश में

जब हम किसी के घर दावत पर जाते हैं और खाना खाते हैं, तो इस्लाम हमें एक ख़ूबसूरत तरीक़ा सिखाता है दुआ पढ़ने का। Dawat Khane Ki Dua वह इस्लामी कलिमात हैं जो हम उस शख़्स के लिए पढ़ते हैं जिसने हमें खाना खिलाया। यह दुआ उस मेज़बान (host) के लिए बरकत और रहमत का ज़रिया बनती है जिसने अपने घर में मेहमान नवाज़ी की।

इस्लाम में मेहमाननवाज़ी का बड़ा मक़ाम है। जब कोई हमें खाना खिलाए, तो उसके लिए दुआ करना सुन्नत-ए-नबवी है। नबी-ए-करीम ﷺ ने ख़ुद इस तरीक़े को अपने अमल से ज़िंदा किया।

Dawat Khane Ki Dua को जानना और पढ़ना हर मुसलमान के लिए ज़रूरी है, ख़ासकर जब वो किसी वलीमे, दावत, या खाने की मजलिस में शरीक हो।

Table of Contents

Dawat Khane Ki Dua In Arabic

दावत में खाना खाने के बाद जो दुआ पढ़ी जाती है, वो यह है:

اللَّهُمَّ بَارِكْ لَهُمْ فِيمَا رَزَقْتَهُمْ، وَاغْفِرْ لَهُمْ وَارْحَمْهُمْ

Dawat Khane Ki Dua Transliteration (Roman English)

Allahumma barik lahum fima razaqtahum, waghfir lahum warhamhum

Dawat Khane Ki Dua In Hindi (हिंदी अर्थ)

“ऐ अल्लाह! इन लोगों को जो तूने रिज़्क़ दिया है उसमें बरकत दे, इन्हें माफ़ कर दे, और इन पर रहम फ़रमा।”

Dawat Khane Ki Dua In English (English Meaning)

“O Allah! Bless them in what You have provided for them, forgive them, and have mercy upon them.”

Dawat Khane Ki Dua In Urdu (اردو ترجمہ)

“اے اللہ! جو تو نے انہیں رزق دیا ہے اس میں برکت عطا فرما، انہیں معاف فرما اور ان پر رحم فرما۔”

Dawat Khane Ki Dua With Tarjuma – मुकम्मल जानकारी

तफ़सील मज़मून
अरबी दुआ اللَّهُمَّ بَارِكْ لَهُمْ فِيمَا رَزَقْتَهُمْ، وَاغْفِرْ لَهُمْ وَارْحَمْهُمْ
Roman Transliteration Allahumma barik lahum fima razaqtahum, waghfir lahum warhamhum
हिंदी तर्जुमा ऐ अल्लाह! इनके रिज़्क़ में बरकत दे, माफ़ कर और रहम फ़रमा
English Meaning O Allah! Bless their provision, forgive them, and have mercy on them
हदीस सोर्स सहीह मुस्लिम
नैरेटर हज़रत अबू हुरैरा رضي الله عنه

Disclaimer: यह आर्टिकल इस्लामी तालीम के लिए है। दी गई दुआएं सहीह हदीस की किताबों से ली गई हैं। किसी भी दीनी मसले में किसी क़ाबिल आलिम से रहनुमाई लेना ज़रूरी है। हम किसी भी ग़लती की सूरत में माफ़ी के तलबगार हैं।

हदीस की रोशनी में दावत की दुआ

यह Dawat Khane Ki Dua सहीह मुस्लिम शरीफ़ में मौजूद है। हज़रत अबू हुरैरा رضي الله عنه से रिवायत है:

रसूलुल्लाह ﷺ ने जब किसी के यहाँ खाना खाया, तो उनके लिए यह दुआ पढ़ी:
“اللَّهُمَّ بَارِكْ لَهُمْ فِيمَا رَزَقْتَهُمْ وَاغْفِرْ لَهُمْ وَارْحَمْهُمْ”

(सहीह मुस्लिम, हदीस: 2042)

यह हदीस साबित करती है कि Dawat Khane Ki Dua पढ़ना नबी-ए-करीम ﷺ की सुन्नत है। जो शख़्स यह दुआ पढ़ता है वो अपने मेज़बान के लिए रहमत और मग़फ़िरत का ज़रिया बनता है।

दावत खाने की दुआ – मुकम्मल तशरीह (Explanation)

Dawat Khane Ki Dua में तीन बातें माँगी गई हैं:

1. بَارِكْ لَهُمْ — उनके रिज़्क़ में बरकत

जब हम मेज़बान के लिए दुआ करते हैं कि “अल्लाह उनके रिज़्क़ में बरकत दे,” तो इसका मतलब यह है कि जो कुछ अल्लाह ने उन्हें दिया है माल, खाना, ताक़त उसमें इज़ाफ़ा हो और वो कम न हो।

बरकत का मतलब महज़ ज़्यादा नहीं होता बरकत का मतलब है कि थोड़ा भी काफ़ी हो जाए।

2. وَاغْفِرْ لَهُمْ — उन्हें माफ़ कर दे

दावत में खिलाने वाले ने जो नेकी की, उस पर अल्लाह से मग़फ़िरत माँगना उसके लिए बहुत बड़ा तोहफ़ा है। यह दुआ मेज़बान के गुनाहों की माफ़ी के लिए है।

3. وَارْحَمْهُمْ — उन पर रहम फ़रमा

अल्लाह की रहमत सबसे बड़ी नेमत है। इस दुआ में हम अपने मेज़बान पर अल्लाह की रहमत की दरख़्वास्त करते हैं।

यह तीनों दुआएं मिलकर एक मुकम्मल दुआ बनाती हैं रिज़्क़ की बरकत, गुनाहों की माफ़ी, और अल्लाह की रहमत।

Dawat Khane Ki Dua कब पढ़ें? (When To Read)

यह दुआ खाना खाने के बाद पढ़ी जाती है।

  • जब आप किसी के घर दावत पर गए हों और खाना खा लिया हो।
  • वलीमे (शादी के खाने) में खाने के बाद।
  • किसी के घर मेहमान के तौर पर खाना खाने के बाद।
  • किसी ने आपको ईद, बच्चे के अक़ीक़े, या किसी ख़ुशी में खिलाया हो।
  • जब कोई ग़रीब या ज़रूरतमंद भी खिलाए उसके लिए यह दुआ और भी अहम है।

ध्यान रखें: यह दुआ खाने के बाद पढ़ी जाती है, खाने के दौरान नहीं।

दावत के वक़्त की और दुआएं

खाना शुरू करने की दुआ

खाना शुरू करने से पहले बिस्मिल्लाह पढ़ें:

بِسْمِ اللَّهِ

Bismillah
“अल्लाह के नाम से”

अगर शुरू में भूल जाएं, तो यह पढ़ें:

بِسْمِ اللَّهِ أَوَّلَهُ وَآخِرَهُ

Bismillahi awwalahu wa akhirahu
“अल्लाह के नाम से शुरुआत में और आख़िर में”

(सुनन अबू दाऊद, हदीस: 3767)

खाना खाने के बाद की दुआ

दावत के अलावा आम खाने के बाद यह दुआ पढ़ें:

الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَطْعَمَنَا وَسَقَانَا وَجَعَلَنَا مُسْلِمِينَ

Alhamdulillahil ladhi at’amana wa saqana wa ja’alana muslimin
“तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं जिसने हमें खिलाया, पिलाया और हमें मुसलमान बनाया।”

(सुनन अबू दाऊद, सुनन तिर्मिज़ी)

Dawat Khane Ki Dua के फ़ायदे (Benefits)

Dawat Khane Ki Dua महज़ अलफ़ाज़ नहीं हैं इनमें कई रूहानी और दुनियावी फ़ायदे हैं:

1. मेज़बान के लिए रिज़्क़ में बरकत

जब हम दुआ करते हैं, तो अल्लाह उस मेज़बान के माल और रिज़्क़ में बरकत देता है। यह दुआ एक ऐसा तोहफ़ा है जो कोई पैसे से नहीं ख़रीद सकता।

2. मेज़बान के गुनाहों की माफ़ी

दुआ में “वाग़फिर लहुम” “उन्हें माफ़ कर” यह जुमला मेज़बान के गुनाहों की माफ़ी का सबब बन सकता है। अल्लाह की नज़र में एक नेक दिल से की गई दुआ बड़ी क़ीमत रखती है।

3. रिश्तों में मोहब्बत और मज़बूती

जब मेज़बान को पता चलता है कि मेहमान ने उसके लिए दिल से दुआ की, तो दिलों में मोहब्बत बढ़ती है।

4. सुन्नत-ए-नबवी का एहया

यह दुआ नबी-ए-करीम ﷺ से साबित है। इसे पढ़ने से नबी ﷺ की सुन्नत ज़िंदा होती है और पढ़ने वाले को सुन्नत का अज्र मिलता है।

5. दुआ क़बूल होने का मौक़ा

खाने के बाद का वक़्त नेमत की शुक्रगुज़ारी का वक़्त है। इस वक़्त की गई दुआ अल्लाह के नज़दीक क़बूलियत के ज़्यादा क़रीब होती है।

6. अल्लाह की रहमत का हुसूल

“वरहमहुम” “उन पर रहम फ़रमा” यह अल्लाह की रहमत माँगना है जो दुनिया और आख़िरत दोनों में काम आती है।

इस्लाम में मेहमाननवाज़ी का मक़ाम

इस्लाम मेहमानों की इज़्ज़त करने और उन्हें खिलाने-पिलाने को बड़ी नेमत मानता है।

रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

“जो अल्लाह और आख़िरत के दिन पर ईमान रखता हो, उसे चाहिए कि अपने मेहमान की इज़्ज़त करे।”

(सहीह बुख़ारी, हदीस: 6018)

इस हदीस से साफ़ है कि मेहमाननवाज़ी ईमान की निशानी है। और जब मेहमान Dawat Khane Ki Dua पढ़े, तो वो इस नेमत का शुक्रिया अदा करता है और मेज़बान के लिए भलाई माँगता है।

दावत खाने का इस्लामी आदाब (Etiquettes)

दावत खाना सिर्फ़ पेट भरना नहीं है इसके कुछ ख़ूबसूरत इस्लामी आदाब हैं:

आदाब तशरीह
दाईं तरफ़ से शुरू करें दाईं तरफ़ के लोगों को पहले परोसा जाता है
बिस्मिल्लाह से शुरू करें खाने की शुरुआत हमेशा अल्लाह का नाम लेकर
दाहिने हाथ से खाएं सुन्नत यह है कि दाहिने हाथ से खाएं
अपने सामने से खाएं दूर से हाथ न बढ़ाएं
खाने की बुराई न करें जो मिले उसे खाएं, नापसंद हो तो छोड़ दें
खाने के बाद दुआ पढ़ें Dawat Khane Ki Dua ज़रूर पढ़ें
मेज़बान का शुक्रिया अदा करें मेज़बान के एहसान को ज़बानी भी सराहें

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निष्कर्ष (Conclusion)

Dawat Khane Ki Dua इस्लाम का एक ख़ूबसूरत उसूल है शुक्रगुज़ारी, मोहब्बत, और दुआ को एक साथ जोड़ने का तरीक़ा।

जब हम किसी के घर खाना खाते हैं, तो उनका एहसान महज़ “शुक्रिया” कहने से नहीं उतरता। बल्कि उनके लिए अल्लाह से बरकत, माफ़ी और रहमत माँगना यही असली इस्लामी शुक्रगुज़ारी है।

नबी-ए-करीम ﷺ की यह सुन्नत आज भी उतनी ही ज़रूरी है जितनी उनके ज़माने में थी। जब हम यह दुआ पढ़ते हैं, तो हम न सिर्फ़ मेज़बान के लिए भलाई माँगते हैं, बल्कि ख़ुद भी एक सुन्नत पर अमल करके अज्र कमाते हैं।

Dawat Khane Ki Dua In Hindi, In Arabic, In Urdu और In English इन तमाम ज़बानों में इसे जानना ज़रूरी है ताकि ज़बान का फ़र्क़ सुन्नत पर अमल के रास्ते में न आए।

अल्लाह तआला हमें इस दुआ को अपनी ज़िंदगी में शामिल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।
आमीन।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: Dawat Khane Ki Dua कौन सी है?

दावत खाने के बाद यह दुआ पढ़ें: اللَّهُمَّ بَارِكْ لَهُمْ فِيمَا رَزَقْتَهُمْ وَاغْفِرْ لَهُمْ وَارْحَمْهُمْ “ऐ अल्लाह! इनके रिज़्क़ में बरकत दे, इन्हें माफ़ कर और रहम फ़रमा।”

Q2: यह दुआ कब पढ़ी जाती है?

खाना खाने के बाद जब आप किसी के यहाँ दावत, वलीमे, या किसी ख़ुशी की मजलिस में मेहमान हों।

Q3: क्या यह दुआ हदीस से साबित है?

जी हाँ। यह सहीह मुस्लिम, हदीस 2042 में हज़रत अबू हुरैरा رضي الله عنه से साबित है।

Q4: Dawat Khane Ki Dua In English क्या है?

“O Allah! Bless them in what You have provided for them, forgive them, and have mercy upon them.”

Q5: Dawat Khane Ki Dua With Tarjuma याद करने का आसान तरीक़ा क्या है?

पहले Roman transliteration बोलें Allahumma barik lahum fima razaqtahum, waghfir lahum warhamhum और साथ में हिंदी मतलब दोहराते रहें। कुछ दिन में ज़बान पर चढ़ जाती है।

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