मृत्यु इस दुनिया की सबसे बड़ी सच्चाई है। इस्लाम में किसी मुसलमान के इंतिक़ाल (मृत्यु) के बाद उसके लिए जनाज़े की नमाज़ अदा करना एक ज़रूरी फ़र्ज़ है। Janaze ki namaz ki dua वे प्रामाणिक प्रार्थनाएं हैं जो मृतक की मग़फ़िरत (माफ़ी), रहमत (दया) और जन्नत के लिए अल्लाह से माँगी जाती हैं।
बहुत से मुसलमान यह नमाज़ पढ़ना चाहते हैं लेकिन सही दुआओं और उनके उच्चारण को लेकर असमंजस में रहते हैं। यह लेख आपको सहीह हदीस पर आधारित सभी दुआएं अरबी, Roman English, हिंदी अर्थ और उर्दू अनुवाद सहित सरल भाषा में प्रस्तुत करता है।
जनाज़े की नमाज़ क्या है?
जनाज़े की नमाज़ (صلاة الجنازة) एक विशेष नमाज़ है जो मुसलमान मृतक के शव के सामने खड़े होकर अदा की जाती है। यह फ़र्ज़-ए-किफ़ाया है यानी अगर मोहल्ले या शहर के कुछ मुसलमान यह नमाज़ पढ़ लें तो सबकी ज़िम्मेदारी पूरी हो जाती है, लेकिन अगर कोई भी न पढ़े तो सभी गुनाहगार होंगे।
जनाज़े की नमाज़ की विशेषताएं:
- इसमें रुकू और सजदा नहीं होता
- कुल चार तकबीरें होती हैं
- पूरी नमाज़ खड़े होकर अदा की जाती है
- क़िबले की तरफ़ रुख़ करके पढ़ी जाती है
- वुज़ू (पवित्रता) अनिवार्य है
Janaze Ki Namaz Ki Dua – पहली तकबीर (सना)
पहली तकबीर “अल्लाहु अकबर” कहने के बाद सना पढ़ी जाती है:
अरबी:
سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ، وَتَبَارَكَ اسْمُكَ، وَتَعَالَىٰ جَدُّكَ، وَلَا إِلَٰهَ غَيْرُكَ
Janaze Ki Namaz Ki Dua In Roman English (उच्चारण):
Subhanakal-lahumma wa bihamdika, wa tabarakas-muka, wa ta’ala jadduka, wa la ilaha ghairuk
Janaze Ki Namaz Ki Dua In Hindi (अर्थ):
“ऐ अल्लाह! तू पाक है और तेरी ही प्रशंसा है। तेरा नाम बरकत वाला है और तेरी शान बुलंद है। तेरे सिवा कोई पूज्य नहीं।”
Janaze Ki Namaz Ki Dua – दूसरी तकबीर (दरूद शरीफ़)
दूसरी तकबीर के बाद दरूद-ए-इब्राहीम पढ़ा जाता है:
अरबी:
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا صَلَّيْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ، اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا بَارَكْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
Janaze Ki Namaz Ki Dua In Roman English (उच्चारण):
Allahumma salli ‘ala Muhammadin wa ‘ala ali Muhammadin, kama sallaita ‘ala Ibrahima wa ‘ala ali Ibrahim, innaka Hameedum Majeed. Allahumma barik ‘ala Muhammadin wa ‘ala ali Muhammadin, kama barakta ‘ala Ibrahima wa ‘ala ali Ibrahim, innaka Hameedum Majeed
Janaze Ki Namaz Ki Dua In Hindi (अर्थ):
“ऐ अल्लाह! हज़रत मुहम्मद (ﷺ) और उनके परिवार पर रहमत भेज, जैसे तूने इब्राहीम (अ.स.) और उनके परिवार पर भेजी। बेशक तू तारीफ़ के लायक़ और बुज़ुर्गी वाला है। ऐ अल्लाह! मुहम्मद (ﷺ) और उनके परिवार पर बरकत नाज़िल फ़रमा, जैसे तूने इब्राहीम (अ.स.) और उनके परिवार पर नाज़िल फ़रमाई।”
तीसरी तकबीर की दुआ – मुख्य Janaze Ki Namaz Ki Dua
तीसरी तकबीर के बाद पढ़ी जाने वाली दुआ इस पूरी नमाज़ का सबसे अहम हिस्सा है। इसमें सीधे मृतक के लिए दुआ की जाती है।
पुरुष मृतक के लिए दुआ
अरबी:
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ، وَعَافِهِ وَاعْفُ عَنْهُ، وَأَكْرِمْ نُزُلَهُ، وَوَسِّعْ مُدْخَلَهُ، وَاغْسِلْهُ بِالْمَاءِ وَالثَّلْجِ وَالْبَرَدِ، وَنَقِّهِ مِنَ الْخَطَايَا كَمَا نَقَّيْتَ الثَّوْبَ الْأَبْيَضَ مِنَ الدَّنَسِ، وَأَبْدِلْهُ دَارًا خَيْرًا مِنْ دَارِهِ، وَأَهْلًا خَيْرًا مِنْ أَهْلِهِ، وَزَوْجًا خَيْرًا مِنْ زَوْجِهِ، وَأَدْخِلْهُ الْجَنَّةَ، وَأَعِذْهُ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ وَمِنْ عَذَابِ النَّارِ
Janaze Ki Namaz Ki Dua In Roman English (उच्चारण):
Allahummagh-fir lahu warhamhu, wa ‘afihi wa’fu ‘anhu, wa akrim nuzulahu, wa wassi’ mudkhalahu, waghsilhu bilma’i waththalji walbarad, wa naqqihi minal-khataya kama naqqaital-thawbal-abyada minad-danas, wa abdilhu daran khairan min darihi, wa ahlan khairan min ahlihi, wa zawjan khairan min zawjihi, wa adkhilhul-jannata, wa a’idhu min ‘adhabil-qabri wa min ‘adhabin-nar
Janaze Ki Namaz Ki Dua In Hindi (अर्थ):
“ऐ अल्लाह! इस मृतक को बख़्श दे और इस पर रहम फ़रमा। इसे आफ़ियत (सेहत और सलामती) दे और इसे माफ़ कर दे। इसके ठहरने की जगह को इज़्ज़त वाली बना। इसकी क़ब्र को विस्तृत कर। इसे पानी, बर्फ़ और ओलों से धो दे। इसे गुनाहों से ऐसे साफ़ कर दे जैसे तूने सफ़ेद कपड़े को मैल से साफ़ किया। इसे इसके घर से बेहतर घर, इसके घर वालों से बेहतर घर वाले और इसकी बीवी से बेहतर बीवी अता फ़रमा। इसे जन्नत में दाख़िल कर और क़ब्र के अज़ाब तथा जहन्नम के अज़ाब से बचा।”
Janaze Ki Namaz Ki Dua In Urdu (उर्दू अनुवाद):
“اے اللہ! اسے بخش دے اور اس پر رحم فرما۔ اسے عافیت دے اور اسے معاف کر دے۔ اس کی قیام گاہ کو با عزت بنا، اس کی قبر کو کشادہ کر۔ اسے پانی، برف اور اولوں سے دھو دے اور گناہوں سے ایسے صاف کر دے جیسے سفید کپڑے کو میل سے صاف کیا۔ اسے اس کے گھر سے بہتر گھر، اہل سے بہتر اہل اور بیوی سے بہتر بیوی عطا فرما۔ اسے جنت میں داخل فرما اور عذابِ قبر اور عذابِ جہنم سے بچا۔”
महिला मृतक के लिए दुआ
महिला के लिए दुआ में “لَهُ” (lahu) की जगह “لَهَا” (laha)” का प्रयोग होता है। इसी तरह “وَارْحَمْهُ” (warhamhu) की जगह “وَارْحَمْهَا” (warhamha) आएगा। शेष पूरी दुआ वही रहती है।
अरबी (महिला के लिए):
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهَا وَارْحَمْهَا، وَعَافِهَا وَاعْفُ عَنْهَا، وَأَكْرِمْ نُزُلَهَا، وَوَسِّعْ مُدْخَلَهَا…
(शेष दुआ पुरुष वाली जैसी, केवल सर्वनाम बदलें)
छोटे बच्चे (नाबालिग़) के लिए विशेष दुआ
जब किसी छोटे बच्चे का जनाज़ा हो तो तीसरी तकबीर के बाद यह विशेष दुआ पढ़ी जाती है:
अरबी:
اللَّهُمَّ اجْعَلْهُ فَرَطًا لِوَالِدَيْهِ، وَذُخْرًا، وَشَفِيعًا مُجَابًا، اللَّهُمَّ ثَقِّلْ بِهِ مَوَازِينَهُمَا، وَأَعْظِمْ بِهِ أُجُورَهُمَا، وَأَلْحِقْهُ بِصَالِحِ الْمُؤْمِنِينَ، وَاجْعَلْهُ فِي كَفَالَةِ إِبْرَاهِيمَ، وَقِهِ بِرَحْمَتِكَ عَذَابَ الْجَحِيمِ
Janaze Ki Namaz Ki Dua In Roman English (उच्चारण):
Allahummaj-‘alhu faratan li-walidaihi, wa dhukhran, wa shafi’an mujaba. Allahumma thaqqil bihi mawazeenahuma, wa a’zim bihi ujurahuma, wa alhiqhu bi-salihil-mu’mineen, waj-‘alhu fi kafalati Ibrahim, wa qihi bi-rahmatika ‘adhabal-jaheem
Janaze Ki Namaz Ki Dua In Hindi (अर्थ):
“ऐ अल्लाह! इस बच्चे को इसके माता-पिता के लिए आगे भेजा गया सवाब बना, एक अमूल्य खज़ाना और क़बूल होने वाली सिफ़ारिश बना। ऐ अल्लाह! इसके ज़रिये उनके नेकियों के पलड़े भारी कर दे और उनके अज्र (पुण्य) को बढ़ा दे। इसे नेक मोमिनों के साथ मिला दे और इब्राहीम (अ.स.) की देखरेख में रख। अपनी रहमत से इसे जहन्नम के अज़ाब से बचा।”
Janaze Ki Namaz Ki Dua – चौथी तकबीर
चौथी और आख़िरी तकबीर के बाद एक संक्षिप्त लेकिन अहम दुआ पढ़ी जाती है:
अरबी:
اللَّهُمَّ لَا تَحْرِمْنَا أَجْرَهُ، وَلَا تَفْتِنَّا بَعْدَهُ، وَاغْفِرْ لَنَا وَلَهُ
Janaze Ki Namaz Ki Dua In Roman English (उच्चारण):
Allahumma la tahrimna ajrahu, wa la taftinna ba’dahu, waghfir lana wa lahu
Janaze Ki Namaz Ki Dua In Hindi (अर्थ):
“ऐ अल्लाह! हमें इस जनाज़े में शरीक होने के सवाब से महरूम न कर। इसकी मृत्यु के बाद हमें फ़ितने में न डाल। हमें भी और इसे भी माफ़ कर दे।”
इसके बाद दाएं और बाएं “अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह” कहकर सलाम फेर दिया जाता है।
Janaze Ki Namaz Ki Dua In English – मुख्य दुआ का अंग्रेज़ी अनुवाद
Janaze ki namaz ki dua in English (तीसरी तकबीर की मुख्य दुआ):
“O Allah, forgive him and have mercy upon him. Grant him wellness and pardon him. Make his place of rest honorable and spacious. Wash him with water, snow, and hail. Cleanse him of sins just as a white garment is cleansed of dirt. Grant him a home better than his home, a family better than his family, and a spouse better than his spouse. Admit him into Paradise and protect him from the punishment of the grave and the punishment of the Fire.”
अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई सभी दुआएं सहीह हदीस और विश्वसनीय इस्लामी स्रोतों से ली गई हैं। अरबी टेक्स्ट, उच्चारण और अर्थ को सटीक रखने की पूरी कोशिश की गई है।
जनाज़े की नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा (संक्षिप्त विधि)
| चरण | क्या करें |
|---|---|
| 1 | नीयत करें — “मैं अल्लाह के लिए इस मृतक का जनाज़ा पढ़ रहा/रही हूं।” |
| 2 | हाथ उठाकर पहली तकबीर कहें → सना पढ़ें |
| 3 | हाथ उठाकर दूसरी तकबीर कहें → दरूद शरीफ़ पढ़ें |
| 4 | हाथ उठाकर तीसरी तकबीर कहें → मृतक के लिए दुआ पढ़ें |
| 5 | हाथ उठाकर चौथी तकबीर कहें → अंतिम दुआ पढ़ें |
| 6 | दाएं-बाएं सलाम फेरें |
ज़रूरी बात: इमाम के पीछे पढ़ते समय दुआएं मन ही मन पढ़ें। मृतक का सिर नमाज़ी की दाईं ओर और पैर बाईं ओर होने चाहिए।
अन्य संबंधित दुआएं
क़ब्रिस्तान जाते समय दुआ:
अरबी:
السَّلَامُ عَلَيْكُمْ أَهْلَ الدِّيَارِ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ وَالْمُسْلِمِينَ، وَإِنَّا إِنْ شَاءَ اللَّهُ بِكُمْ لَاحِقُونَ، نَسْأَلُ اللَّهَ لَنَا وَلَكُمُ الْعَافِيَةَ
उच्चारण:
Assalamu ‘alaikum ahlad-diyari minal-mu’mineena wal-muslimeen, wa inna in sha Allahu bikum lahiqoon, nas’alullaha lana wa lakumul-‘afiyah
अर्थ:
“सलाम हो तुम पर, ऐ इस जगह के रहने वाले मोमिनो और मुसलमानो! हम भी इन्शा अल्लाह तुमसे मिलने वाले हैं। हम अल्लाह से अपने लिए और तुम्हारे लिए आफ़ियत माँगते हैं।”
मृतक की क़ब्र पर दुआ:
अरबी:
اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ، اللَّهُمَّ ثَبِّتْهُ
उच्चारण:
Allahummagh-fir lahu, Allahumma thabbithu
अर्थ:
“ऐ अल्लाह! इसे बख़्श दे। ऐ अल्लाह! इसे (सवालों के जवाब देने में) साबित-क़दम रख।”
Janaze Ki Namaz Ki Dua के फ़ायदे और अहमियत
इस्लाम में janaze ki namaz ki dua की बड़ी अहमियत है। नबी करीम (ﷺ) ने फ़रमाया कि जो व्यक्ति किसी मुसलमान के जनाज़े में शरीक होकर नमाज़ अदा करे, उसे एक क़ीरात के बराबर सवाब मिलता है, और जो क़ब्र में दफ़नाने तक रुके उसे दो क़ीरात का सवाब मिलता है।
(सहीह बुख़ारी)
इस नमाज़ के कुछ मुख्य फ़ायदे:
- मृतक के लिए: अल्लाह की मग़फ़िरत (माफ़ी), रहमत और जन्नत की दुआ मिलती है
- नमाज़ पढ़ने वाले के लिए: भारी सवाब और मौत की याद दिलाने वाला नसीहत
- समाज के लिए: मुसलमानों में आपसी भाईचारा और एकता का इज़हार
सामान्य ग़लतियां जिनसे बचें
ग़लती 1 – ग़लत सर्वनाम का प्रयोग: पुरुष मृतक के लिए “لَهُ” (lahu)” और महिला के लिए “لَهَا” (laha)” का सही प्रयोग ज़रूरी है।
ग़लती 2 – तकबीर के बाद हाथ न बांधना: हर तकबीर के बाद हाथ बांधने चाहिए।
ग़लती 3 – जल्दबाज़ी में दुआ छोड़ देना: अगर पूरी दुआ याद न हो तो कम से कम “اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ” ज़रूर पढ़ें।
ग़लती 4 – सलाम न फेरना: नमाज़ सलाम से पूरी होती है इसे छोड़ना नहीं चाहिए।
ग़लती 5 – बिना वुज़ू के शामिल होना: जनाज़े की नमाज़ के लिए वुज़ू अनिवार्य है।
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निष्कर्ष (conclusion)
Janaze ki namaz ki dua इस्लाम में मृतक के प्रति अंतिम सम्मान और प्यार का सबसे बड़ा माध्यम है। यह नमाज़ न केवल मृतक की मग़फ़िरत का ज़रिया है बल्कि ज़िंदा लोगों को भी आख़िरत की याद दिलाती है।
इस लेख में बताई गई सभी दुआएं Janaze ki namaz ki dua in Hindi, Janaze ki namaz ki dua in English, Janaze ki namaz ki dua in Roman English और Janaze ki namaz ki dua in Urdu सहीह हदीस और प्रामाणिक इस्लामी स्रोतों से ली गई हैं। इन्हें सही उच्चारण और अर्थ के साथ पढ़ने से नमाज़ में ख़ुशू (एकाग्रता) पैदा होती है।
याद रखें मृतक आपकी दुआओं का मोहताज है। पूरे दिल और ध्यान के साथ यह इबादत अदा करें।
अल्लाह हम सभी को सही तरीक़े से जनाज़े की नमाज़ अदा करने और अपने मृतकों के लिए दुआ करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
? FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या औरतें जनाज़े की नमाज़ पढ़ सकती हैं?
जी हाँ, औरतें जनाज़े की नमाज़ पढ़ सकती हैं। बेहतर है कि वे घर पर रहकर मृतक के लिए दुआ करें, लेकिन नमाज़ पढ़ना उनके लिए जायज़ है।
2. अगर janaze ki namaz ki dua पूरी याद न हो तो क्या करें?
अगर पूरी दुआ याद नहीं है तो कम से कम “اللَّهُمَّ اغْفِرْ لَهُ وَارْحَمْهُ” (Allahummagh-fir lahu warhamhu) बार-बार पढ़ें। यह भी अल्लाह के नज़दीक काफ़ी है।
3. क्या हर तकबीर पर हाथ उठाने ज़रूरी हैं?
अधिकांश विद्वानों के अनुसार हर तकबीर पर हाथ उठाना सुन्नत है। कुछ मसलक में केवल पहली तकबीर पर हाथ उठाए जाते हैं।
4. जनाज़े की नमाज़ कितनी बार पढ़ी जा सकती है?
एक मृतक के लिए एक बार जनाज़े की नमाज़ पढ़ना काफ़ी है। जो पहली नमाज़ में शामिल नहीं हो पाया, वह बाद में भी पढ़ सकता है।
5. क्या बिना वुज़ू के जनाज़े की नमाज़ पढ़ सकते हैं?
नहीं। जनाज़े की नमाज़ के लिए भी वुज़ू ज़रूरी है, जैसे अन्य नमाज़ों के लिए होता है।
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