Nazar Utarne Ki Dua – अरबी, हिंदी अर्थ और पूरा तरीका

नज़र, यानी बुरी नज़र, एक हकीकी चीज़ है जिसे इस्लाम ने पूरी तरह तस्लीम किया है। अल्लाह के नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ ने फरमाया कि नज़र सच है और यह इंसान को नुकसान पहुँचा सकती है उसकी सेहत को, उसके बाल-बच्चों को, उसके काम-धंधे को।

जब किसी को नज़र लग जाए, तो इस्लाम ने उसके लिए मुकम्मल इलाज दिया है। Nazar Utarne Ki Dua वह मसनून दुआ है जो नबी ﷺ ने खुद पढ़ी और दूसरों को सिखाई। यह दुआ सिर्फ अलफ़ाज़ नहीं यह अल्लाह की पनाह में आने का तरीका है।

यह लेख आपको कुरआन और सहीह हदीस से ली गई Nazar Utarne Ki Dua के बारे में पूरी जानकारी देगा अरबी मतन, रोमन तर्जुमा, हिंदी अर्थ, और सही तरीके के साथ।

Nazar Utarne Ki Dua In Quran

कुरआन मजीद में अल्लाह ने खुद इंसान को हर बुराई से बचने की दुआ सिखाई है। Nazar Utarne Ki Dua in Quran के लिए सबसे ज़्यादा पढ़ी जाने वाली सूरतें सूरह अल-फलक और सूरह अन-नास हैं। नबी ﷺ ने फरमाया कि ये दोनों सूरतें बुरी नज़र और हर शर से बचाती हैं।

सूरह अल-फलक (Surah Al-Falaq)

अरबी:

بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ

قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلْفَلَقِ ﴿١﴾ مِن شَرِّ مَا خَلَقَ ﴿٢﴾ وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ ﴿٣﴾ وَمِن شَرِّ ٱلنَّفَّٰثَٰتِ فِى ٱلْعُقَدِ ﴿٤﴾ وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ ﴿٥﴾

रोमन तर्जुमा:

Qul a’udhu bi rabbil-falaq. Min sharri maa khalaq. Wa min sharri ghaasiqin idhaa waqab. Wa min sharrin-naffaathaati fil-‘uqad. Wa min sharri haasidin idhaa hasad.

हिंदी अर्थ:

कहो मैं सुबह के रब की पनाह माँगता हूँ। हर उस चीज़ की बुराई से जो उसने बनाई है। और अँधेरी रात की बुराई से जब वह छा जाए। और गाँठों पर फूँकने वालियों की बुराई से। और हसद करने वाले की बुराई से जब वह हसद करे।

सूरह अन-नास (Surah An-Nas)

अरबी:

بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ

قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ ٱلنَّاسِ ﴿١﴾ مَلِكِ ٱلنَّاسِ ﴿٢﴾ إِلَٰهِ ٱلنَّاسِ ﴿٣﴾ مِن شَرِّ ٱلْوَسْوَاسِ ٱلْخَنَّاسِ ﴿٤﴾ ٱلَّذِى يُوَسْوِسُ فِى صُدُورِ ٱلنَّاسِ ﴿٥﴾ مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ ﴿٦﴾

रोमन तर्जुमा:

Qul a’udhu bi rabbin-naas. Malikin-naas. Ilaahin-naas. Min sharril waswaasil khannaas. Alladhi yuwaswisu fi sudurin-naas. Minal jinnati wan-naas.

हिंदी अर्थ:

कहो मैं इंसानों के रब की पनाह माँगता हूँ। इंसानों के बादशाह की। इंसानों के माबूद की। उस छुपकर वसवसे डालने वाले की बुराई से। जो लोगों के सीनों में वसवसा डालता है। चाहे वह जिन्नों में से हो या इंसानों में से।

Nazar Utarne Ki Dua — हदीस से

यह Nazar Utarne Ki Dua सहीह अल-बुखारी और सहीह मुस्लिम में मौजूद है। नबी ﷺ इसे रुक्या (दम) के तौर पर पढ़ते थे।

अरबी:

أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللّٰهِ التَّامَّةِ مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَهَامَّةٍ، وَمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لَامَّةٍ

रोमन तर्जुमा:

A’udhu bi kalimaatillaahit-taammati min kulli shaytaanin wa haammah, wa min kulli ‘aynin laammah.

हिंदी अर्थ:

मैं अल्लाह के पूरे-पूरे कलिमों की पनाह माँगता हूँ हर शैतान से, हर ज़हरीले जानवर से, और हर उस नज़र से जो नुकसान पहुँचाए।

हवाला: सहीह अल-बुखारी, हदीस नंबर 3371

Nazar Utarne Ki Dua In Hindi

नज़र उतारने की दुआ हिंदी में (रुक्या की मसनून दुआ)

यह दुआ नबी ﷺ ने खुद पढ़ी और सहाबा को सिखाई। जब किसी को नज़र लगे तो यह दुआ पढ़ कर उस पर फूँकें:

अरबी:

بِاسْمِ اللّٰهِ أَرْقِيكَ، مِنْ كُلِّ شَيْءٍ يُؤْذِيكَ، مِنْ شَرِّ كُلِّ نَفْسٍ أَوْ عَيْنِ حَاسِدٍ، اللّٰهُ يَشْفِيكَ

रोमन तर्जुमा:

Bismillaahi arqeeka, min kulli shay’in yu’dheeka, min sharri kulli nafsin aw ‘aynin haasid, Allaahu yashfeeka.

हिंदी अर्थ:

अल्लाह के नाम से मैं तुम पर दम करता हूँ। हर उस चीज़ से जो तुम्हें तकलीफ दे। हर नफ़्स की बुराई से और हर हसद करने वाली नज़र से अल्लाह तुम्हें शिफा दे।

Balo Ki Nazar Utarne Ki Dua

बाल अगर खूबसूरत हों तो उन पर नज़र जल्दी लगती है। Balo Ki Nazar Utarne Ki Dua के लिए यह मसनून दुआ पढ़ें:

अरबी:

أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللّٰهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ

रोमन तर्जुमा:

A’udhu bi kalimaatillaahit-taammaati min sharri maa khalaq.

हिंदी अर्थ:

मैं अल्लाह के पूरे-पूरे कलिमों की पनाह माँगता हूँ उसकी हर मखलूक की बुराई से।

तरीका:

यह दुआ 3 बार पढ़ें। हर बार पढ़ने के बाद हथेलियों पर हल्की फूँक मारें और सिर पर या बालों पर फेरें। यह सुन्नत तरीका है।

Bacho Ki Nazar Utarne Ki Dua

बच्चों पर नज़र सबसे जल्दी लगती है। नबी ﷺ अपने नवासों हज़रत हसन और हज़रत हुसैन رضي الله عنهما के लिए यह दुआ पढ़ते थे। यह Bacho Ki Nazar Utarne Ki Dua सबसे मुस्तनद (प्रामाणिक) दुआ है:

अरबी:

أُعِيذُكُمَا بِكَلِمَاتِ اللّٰهِ التَّامَّةِ مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَهَامَّةٍ وَمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لَامَّةٍ

रोमन तर्जुमा:

U’eedhukumaa bi kalimaatillaahit-taammati min kulli shaytaanin wa haammah, wa min kulli ‘aynin laammah.

हिंदी अर्थ:

मैं तुम दोनों को अल्लाह के पूरे-पूरे कलिमों की पनाह में देता हूँ हर शैतान से, हर ज़हरीले जानवर से, और हर नुकसान पहुँचाने वाली नज़र से।

Disclaimer: इस लेख में दी गई तमाम दुआएँ सहीह अल-बुखारी, सहीह मुस्लिम और सुनन अबू दाऊद जैसी मुस्तनद हदीस की किताबों से ली गई हैं। इस्लामी मसायल के लिए हमेशा किसी क़ाबिल आलिम से रहनुमाई लें।

बच्चों पर नज़र उतारने का तरीका:

  • बच्चे को सामने बिठाएँ या गोद में लें।
  • यह दुआ 3 बार पढ़ें।
  • हर बार पढ़ने के बाद बच्चे पर हल्की फूँक मारें।
  • सुबह और रात सोने से पहले यह अमल करें।
  • अगर बच्चा बहुत छोटा हो तो माँ या बाप दुआ पढ़ें और फूँकें।

Nazar Utarne Ki Dua Or Tarika

सिर्फ दुआ जानना काफी नहीं Nazar Utarne Ki Dua or Tarika यानी दुआ के साथ उसका सही तरीका जानना भी ज़रूरी है। नबी ﷺ ने रुक्या का जो तरीका सिखाया, वह यह है:

मुकम्मल तरीका — कदम ब कदम

पहला कदम — वुज़ू करें: पाक-साफ होकर दुआ शुरू करें। वुज़ू की हालत में दुआ ज़्यादा कारगर होती है।

दूसरा कदम — बिस्मिल्लाह पढ़ें: हर काम की शुरुआत बिस्मिल्लाह से करें।

तीसरा कदम — दुआ पढ़ें: ऊपर दी गई कोई भी मसनून दुआ 3 बार या 7 बार पढ़ें। बेसी अदद (ताक यानी odd numbers) सुन्नत से साबित हैं।

चौथा कदम — फूँकें: हर बार पढ़ने के बाद हल्की साँस के साथ फूँकें खुद पर, या जिस पर नज़र हुई हो उस पर। फूँकने के साथ हाथ भी फेरा जा सकता है।

पाँचवाँ कदम — पानी पर दम करें (अगर ज़रूरत हो): एक बर्तन में पानी लें। इस पर ये दुआएँ पढ़ें और फूँकें। फिर यह पानी नज़र वाले को पिलाएँ और उससे नहाएँ। यह तरीका हदीस में आया है।

एक और मसनून तरीका — नज़र लगाने वाले का वुज़ू

अगर पता हो कि किसने नज़र लगाई, तो उस शख्स से वुज़ू करवाएँ और वुज़ू का पानी नज़र वाले पर डालें। यह तरीका नबी ﷺ से साबित है।

आयतुल कुर्सी — नज़र से बचाव की ढाल

Nazar Utarne Ki Dua के साथ आयतुल कुर्सी भी ज़रूर पढ़ें। नबी ﷺ ने फरमाया कि जो शख्स रात को सोने से पहले आयतुल कुर्सी पढ़े, अल्लाह उसकी हिफाज़त के लिए एक फरिश्ता मुकर्रर कर देता है।

अरबी:

اللّٰهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ ۚ لَا تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ ۚ لَّهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۗ مَن ذَا الَّذِي يَشْفَعُ عِندَهُ إِلَّا بِإِذْنِهِ ۚ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ ۖ وَلَا يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِّنْ عِلْمِهِ إِلَّا بِمَا شَاءَ ۚ وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ ۖ وَلَا يَئُودُهُ حِفْظُهُمَا ۚ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ

हिंदी अर्थ:

अल्लाह उसके सिवा कोई माबूद नहीं। वह हमेशा ज़िंदा और हर चीज़ का क़ायम रखने वाला है। उसे न ऊँघ आती है न नींद। आसमानों और ज़मीन में जो कुछ है वह उसी का है। कौन है जो उसकी इजाज़त के बिना उसके सामने सिफारिश कर सके? वह जानता है जो कुछ उनके सामने है और जो उनके पीछे है। वे उसके इल्म में से किसी चीज़ को नहीं घेर सकते मगर जितना वह चाहे। उसकी कुर्सी आसमानों और ज़मीन को घेरे हुए है। उनकी हिफाज़त उसे थकाती नहीं। वह बुलंद है, बहुत बड़ा है।

नज़र से बचाव के लिए रोज़ाना की दुआएँ

नज़र उतारने के साथ-साथ नज़र से बचाव भी ज़रूरी है। नबी ﷺ ने यह दुआएँ सुबह-शाम पढ़ने की तालीम दी:

सुबह-शाम की हिफाज़ती दुआ:

अरबी:

بِسْمِ اللّٰهِ الَّذِي لَا يَضُرُّ مَعَ اسْمِهِ شَيْءٌ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ وَهُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ

रोमन तर्जुमा:

Bismillaahilladhi laa yadurru ma’asmihi shay’un fil-ardi wa laa fis-samaa’i wa huwas-samee’ul-‘aleem.

हिंदी अर्थ:

अल्लाह के नाम से जिसके नाम के साथ ज़मीन में और आसमान में कोई चीज़ नुकसान नहीं पहुँचा सकती। और वह सुनने वाला, जानने वाला है।

इस दुआ को सुबह 3 बार और शाम 3 बार पढ़ना नज़र और हर बुराई से हिफाज़त करता है।

इस दुआ को कब पढ़ें

  • जब बिना किसी वजह के अचानक थकान या कमज़ोरी महसूस हो।
  • जब बच्चा अचानक बीमार पड़ जाए या बहुत रोए।
  • जब किसी की तारीफ के बाद उसका काम रुक जाए।
  • जब कोई अच्छी चीज़ देखे तो खुद “माशाअल्लाह, लाकूव्वता इल्लाबिल्लाह” पढ़े ताकि नज़र न लगे।
  • सुबह और शाम एहतियात के तौर पर।
  • रात को सोने से पहले आयतुल कुर्सी और मुअव्विज़तैन (सूरह फलक और सूरह नास) पढ़ें।

Nazar Utarne Ki Dua के फायदे

यह फायदे कुरआन और सहीह हदीस से साबित हैं:

१. बुरी नज़र से हिफाज़त: इन दुआओं को पढ़ने से अल्लाह का ज़िक्र दिल और बदन के चारों तरफ एक ढाल बन जाता है।

२. नज़र के असर से शिफा: यकीन के साथ पढ़ने पर अल्लाह की रहमत से नज़र का असर दूर होता है।

३. दिल का सुकून: इन कलिमात को पढ़ने से घबराहट और बेचैनी दूर होती है।

४. घर में बरकत: जिस घर में यह दुआएँ रोज़ाना पढ़ी जाएँ, वहाँ अल्लाह की हिफाज़त रहती है।

५. सुन्नत पर अमल का सवाब: यह दुआएँ पढ़ना खुद एक इबादत है जिसका अजर मिलता है।

नबी ﷺ ने फरमाया:

“बुरी नज़र सच है। अगर कोई चीज़ तकदीर से आगे निकल सकती, तो वह नज़र होती।”

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निष्कर्ष (Conclusion)

नज़र एक हकीकी चीज़ है लेकिन उससे डरने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि अल्लाह ने उसका इलाज भी अता किया है। Nazar Utarne Ki Dua चाहे Nazar Utarne Ki Dua in Quran से हो, या हदीस से सब का मकसद एक है: अल्लाह की पनाह में आना।

Bacho Ki Nazar Utarne Ki Dua हर माँ-बाप को याद होनी चाहिए। Balo Ki Nazar Utarne Ki Dua और Nazar Utarne Ki Dua or Tarika को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल करें।

इन दुआओं को सिर्फ नज़र लगने पर नहीं, बल्कि एहतियात के तौर पर भी रोज़ाना पढ़ें। अल्लाह पर यकीन रखें, उसकी पनाह माँगें वही सबसे बड़ा हिफाज़त करने वाला है।

अल्लाह हम सबको, हमारे घरों को, हमारे बाल-बच्चों को बुरी नज़र और हर शर से महफूज़ रखे। आमीन।

? अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

सवाल १: क्या नज़र लगना सच है? इस्लाम क्या कहता है?

हाँ, इस्लाम में नज़र (बुरी नज़र) का सच होना कुरआन और सहीह हदीस से साबित है। नबी ﷺ ने खुद फरमाया कि नज़र हक है।

सवाल २: Nazar Utarne Ki Dua कितनी बार पढ़नी चाहिए?

आमतौर पर 3 बार या 7 बार पढ़ना सुन्नत से साबित है। रुक्या में ताक अदद (odd numbers) पसंद की जाती है।

सवाल ३: Nazar Utarne Ki Dua in Quran कौन सी है?

सूरह अल-फलक और सूरह अन-नास ये दोनों सूरतें सीधे कुरआन से हैं और बुरी नज़र के खिलाफ सबसे ज़्यादा पढ़ी जाने वाली दुआएँ हैं।

सवाल ४: Balo Ki Nazar Utarne Ki Dua क्या है?

ऊपर दी गई दुआ “A’udhu bi kalimaatillaahit-taammaati min sharri maa khalaq” पढ़ें और हाथों पर फूँक कर बालों पर फेरें।

सवाल ५: Bacho Ki Nazar Utarne Ki Dua कौन सी है?

नबी ﷺ ने हज़रत हसन और हुसैन رضي الله عنهما के लिए जो दुआ पढ़ी “U’eedhukumaa bi kalimaatillaahit-taammati…” वह बच्चों के लिए सबसे मुस्तनद दुआ है।

सवाल ६: Nazar Utarne Ki Dua or Tarika क्या है?

वुज़ू करें, बिस्मिल्लाह पढ़ें, दुआ 3 या 7 बार पढ़ें, हर बार फूँकें। ज़रूरत हो तो पानी पर दम करके पिलाएँ या नहलाएँ।

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