Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua | अरबी, हिंदी, उर्दू तर्जुमे के साथ

मस्जिद अल्लाह तआला का घर है। यह वह पाक जगह है जहाँ बंदे अपने रब के सामने सजदा करते हैं, नमाज़ अदा करते हैं और दुआएं माँगते हैं। जब कोई मुसलमान मस्जिद में क़दम रखता है, तो वह एक मुक़द्दस और बाइज़्ज़त जगह में दाखिल होता है।

इस्लाम में हर काम की एक सुन्नत और तरीक़ा है। मस्जिद में दाखिल होने का भी एक खास तरीक़ा है जिसे हमारे नबी हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने बताया है। Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua पढ़ना सुन्नते नबवी है और इससे बंदे के गुनाहों की मग़फ़िरत और अल्लाह की रहमत हासिल होती है।

जो लोग इस दुआ के बारे में नहीं जानते, उनके लिए यहाँ Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Arabic, Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Hindi, Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Urdu और Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in English सभी ज़बानों में तर्जुमे और तशरीह के साथ पेश की जा रही है।

Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Arabic

मस्जिद में दाखिल होने की दुआ अरबी में इस तरह है:

اَللّٰهُمَّ افْتَحْ لِيْ اَبْوَابَ رَحْمَتِكَ

यह दुआ सहीह मुस्लिम की हदीस में वारिद हुई है। हज़रत अबू हुमैद या हज़रत अबू उसैद रज़ियल्लाहु अन्हुमा से रिवायत है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “जब तुम में से कोई मस्जिद में दाखिल हो तो यह दुआ पढ़े।”

Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua Transliteration (Roman में)

Allahumma Iftah Li Abwaba Rahmatik

इस तशरीह को रोमन हुरूफ़ में लिखा गया है ताकि जो लोग अरबी नहीं पढ़ सकते वे भी इसे आसानी से पढ़ सकें।

Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Hindi (हिंदी तर्जुमा)

हिंदी में इस दुआ को इस तरह पढ़ा जाता है:

“अल्लाहुम्मफ्तह ली अबवाब रहमतिक”

हिंदी तर्जुमा:

“ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे।”

Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Urdu (उर्दू तर्जुमा)

Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Urdu इस तरह है:

اے اللہ! میرے لیے اپنی رحمت کے دروازے کھول دے۔

उर्दू ज़बान में यह दुआ उन लोगों के लिए बेहद आसान है जो उर्दू पढ़ना-लिखना जानते हैं।

Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in English (इंग्लिश तर्जुमा)

Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in English का तर्जुमा कुछ इस तरह है:

“O Allah! Open for me the doors of Your mercy.”

यह तर्जुमा उन मुसलमानों के लिए उपयोगी है जो इंग्लिश माध्यम में इस्लामी तालीम हासिल करते हैं।

Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua With Tarjuma (मुकम्मल दुआ तर्जुमे के साथ)

ज़बान दुआ
अरबी اَللّٰهُمَّ افْتَحْ لِيْ اَبْوَابَ رَحْمَتِكَ
तशरीह (Roman) Allahumma Iftah Li Abwaba Rahmatik
हिंदी अल्लाहुम्मफ्तह ली अबवाब रहमतिक
हिंदी मअना ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे
इंग्लिश O Allah! Open for me the doors of Your mercy
उर्दू اے اللہ! میرے لیے رحمت کے دروازے کھول دے

Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua with Tarjuma को याद करना हर मुसलमान के लिए बेहद ज़रूरी है।

Disclaimer: इस वेबसाइट पर Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua और दीगर इस्लामी दुआओं से मुताल्लिक़ जो भी मज़मून पेश किया गया है, वह सहीह हदीस की मुस्तनद किताबों और क़ाबिल-ए-एतिमाद इस्लामी उलमा के हवाले से लिया गया है।

मस्जिद में दाखिल होने की दुआ की तशरीह (Explanation)

यह दुआ बहुत मुख़्तसर मगर बेहद पुरअसर है। इसमें बंदा अल्लाह तआला से गुज़ारिश करता है कि वह अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे।

मस्जिद में दाखिल होते वक्त इस दुआ को पढ़ने का मतलब यह है कि बंदा अल्लाह की बारगाह में हाज़िर होने से पहले उसकी मेहरबानी और रहमत का तालिब होता है। यह दुआ उस अदब और तहज़ीब को ज़ाहिर करती है जो इस्लाम में मस्जिद के लिए मुक़र्रर है।

हदीस में साफ़ तौर पर बताया गया है कि जो शख्स मस्जिद में दाखिल होते वक्त यह दुआ पढ़े, उस पर अल्लाह की रहमत का नुज़ूल होता है और उसकी इबादत क़बूलियत की राह पर होती है।

मस्जिद में दाखिल होने का सही वक्त और तरीक़ा

Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua पढ़ने का सही वक्त वह है जब आप मस्जिद के दरवाज़े पर क़दम रखें।

मस्जिद में दाखिल होने का सुन्नत तरीक़ा यह है:

  • दाहिना (दायाँ) पाँव पहले अंदर रखें यह सुन्नते नबवी है।
  • दरवाज़े पर पहुँचते ही Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua पढ़ें।
  • मस्जिद में दाखिल होने से पहले जूते-चप्पल बाहर उतारें।
  • मस्जिद में दाखिल होते ही अगर लोग नमाज़ या तिलावत में न हों तो सलाम करें।
  • मस्जिद में बैठने से पहले अगर वक्त हो तो दो रकात तहिय्यतुल मस्जिद नमाज़ अदा करें।
  • मस्जिद में किसी भी क़िस्म की दुनियावी बात से परहेज़ करें।

यह सभी आदाब सुन्नते नबवी से साबित हैं और हर नमाज़ी को इन पर अमल करना चाहिए।

Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua के फ़ायदे (Benefits)

1. अल्लाह की रहमत हासिल होती है जो बंदा दिल की गहराई से यह दुआ पढ़ता है, अल्लाह तआला उस पर अपनी ख़ास रहमत नाज़िल फ़रमाता है।

2. इबादत का सवाब बढ़ता है मस्जिद में दाखिल होते वक्त यह दुआ पढ़ने से नमाज़ और दीगर इबादत का सवाब कई गुना ज़्यादा हो जाता है।

3. सुन्नत पर अमल होता है यह दुआ हमारे प्यारे नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत है। इस पर अमल करने से सुन्नत की पैरवी का सवाब मिलता है।

4. दिल में सकून और ख़ुशूअ पैदा होता है जो शख्स दुआ पढ़ कर मस्जिद में दाखिल होता है, उसका दिल इबादत के लिए तैयार और मुत्मइन होता है।

5. बरकत में इज़ाफ़ा होता है मस्जिद जाने का मक़सद अल्लाह को राज़ी करना होता है। इस दुआ के ज़रिए बंदे का मक़सद और नीयत और भी ख़ालिस हो जाती है जिससे बरकत हासिल होती है।

इस दुआ को कब पढ़ें

यह दुआ उस लम्हे पढ़ी जाती है जब आप मस्जिद के दरवाज़े पर पहुँचें और दाहिना क़दम अंदर रखें

कुछ उलमा का कहना है कि यह दुआ दरवाज़े के बाहर खड़े होकर पढ़ी जाए और फिर दाहिना पाँव अंदर रखा जाए। दोनों तरीक़े सही हैं, लेकिन अफ़ज़ल यह है कि दुआ पढ़ते हुए क़दम रखें।

यह दुआ हर नमाज़ में मस्जिद आने पर पढ़ी जाती है चाहे फ़ज्र हो, ज़ुहर हो, अस्र हो, मग़रिब हो या इशा।

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निष्कर्ष (Conclusion)

Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua एक मुख़्तसर मगर बेहद अहम दुआ है। यह सुन्नते नबवी है और इसे पढ़ने से अल्लाह की रहमत के दरवाज़े बंदे के लिए खुल जाते हैं।

हर मुसलमान को चाहिए कि वह मस्जिद में दाखिल होते वक्त यह दुआ ज़रूर पढ़े चाहे वह Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Arabic में याद हो, Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Hindi में हो, Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in Urdu में हो या Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua in English में हो।

दुआ की ज़बान अल्लाह की बारगाह में कोई रुकावट नहीं है, लेकिन धीरे-धीरे अरबी में याद करने की कोशिश ज़रूर करें क्योंकि यही नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत है।

अल्लाह तआला हम सबको इस दुआ पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए और हमारी नमाज़ें और इबादतें क़बूल फ़रमाए। आमीन।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs) ?

Q1: Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua कौन सी है?

اَللّٰهُمَّ افْتَحْ لِيْ اَبْوَابَ رَحْمَتِكَ “ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे।” यह दुआ सहीह मुस्लिम में मौजूद है।

Q2: क्या Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua पढ़ना ज़रूरी है?

यह दुआ वाजिब नहीं बल्कि सुन्नत है। लेकिन नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इसे पढ़ने की ताकीद फ़रमाई है, इसलिए हमेशा इस पर अमल करना चाहिए।

Q3: मस्जिद में दाखिल होते वक्त कौन सा पाँव पहले रखें?

मस्जिद में दाखिल होते वक्त दायाँ (दाहिना) पाँव पहले रखना सुन्नत है। यह नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का तरीक़ा था।

Q4: क्या औरतें भी यह दुआ पढ़ सकती हैं?

जी हाँ, यह दुआ मर्द और औरत दोनों के लिए है। जो भी मस्जिद में दाखिल हो, वह यह दुआ पढ़े।

Q5: Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua की हदीस कहाँ मिलती है?

यह दुआ सहीह मुस्लिम, हदीस नम्बर 713 में मिलती है। यह एक सही और मुस्तनद हदीस है।

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