Roza Kholne Ki Dua In Hindi – अरबी, उच्चारण और अर्थ सहित

रमज़ान का महीना इबादत, सब्र और शुक्र का महीना होता है। इस मुबारक महीने में हर रोज़ रखना और सही वक्त पर उसे खोलना एक अहम इबादत है। Roza Kholne Ki Dua In Hindi जानना हर उस मुसलमान के लिए ज़रूरी है जो इस सुन्नत पर सही तरीके से अमल करना चाहता है।

यह दुआ इफ्तार के वक्त पढ़ी जाती है यानी जब मग़रिब की अज़ान होती है और रोज़ा तोड़ने का समय आता है। रोज़ा खोलने से पहले एक खास दुआ पढ़ी जाती है जिसे Roza Kholne Ki Dua या दुआ-ए-इफ्तार कहते हैं। इस दुआ को पढ़ना सुन्नत है और इसमें अल्लाह तआला का शुक्र अदा किया जाता है कि उसने हमें रोज़ा रखने की तौफ़ीक़ दी और अब इफ्तार नसीब किया।

Table of Contents

Roza Kholne Ki Dua – अरबी में

اللَّهُمَّ لَكَ صُمْتُ وَبِكَ آمَنْتُ وَعَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ وَعَلَى رِزْقِكَ أَفْطَرْتُ

Roza Kholne Ki Dua – उच्चारण (Transliteration)

अल्लाहुम्मा लका सुम्तु व बिका आमन्तु व अलैका तवक्कल्तु व अला रिज़्क़िका अफ़्तर्तु

Roza Kholne Ki Dua In Hindi – अर्थ

“ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा, तुझ पर ईमान लाया, तुझी पर भरोसा किया और तेरे ही रिज़्क़ से रोज़ा तोड़ा।”

Roza Kholne Ki Dua In Urdu

اے اللہ! میں نے تیرے لیے روزہ رکھا، تجھ پر ایمان لایا، تجھی پر بھروسہ کیا اور تیرے ہی رزق سے روزہ توڑا۔

Roza Kholne Ki Dua In English

“O Allah! For You I fasted, in You I believed, upon You I relied, and with Your provision I break my fast.”

Roza Kholne Ki Dua In Arabic – विस्तृत जानकारी

Roza Kholne Ki Dua In Arabic तीन बेहद ज़रूरी बातों को समेटे हुए है। जब हम यह दुआ पढ़ते हैं तो हम अल्लाह के सामने तीन बड़े इक़रार करते हैं:

  • “लका सुम्तु” – यह रोज़ा सिर्फ़ तेरे लिए रखा, किसी दिखावे के लिए नहीं।
  • “बिका आमन्तु” – मेरा ईमान सिर्फ़ तुझ पर है।
  • “अला रिज़्क़िका अफ़्तर्तु” – जो कुछ मैं खा-पी रहा हूँ, वह तेरा दिया हुआ रिज़्क़ है।

यह दुआ हज़रत इब्ने अब्बास (रज़ि. अल्लाहु अन्हु) से रिवायत है और अबू दाऊद में मौजूद है। अहले-इल्म ने इसे हसन या सहीह क़रार दिया है।

एक और मशहूर Roza Kholne Ki Dua

इफ्तार के वक्त एक और दुआ भी पढ़ी जाती है जो हदीस से साबित है:

अरबी:

ذَهَبَ الظَّمَأُ وَابْتَلَّتِ الْعُرُوقُ وَثَبَتَ الأَجْرُ إِنْ شَاءَ اللَّهُ

उच्चारण:

ज़हबज़-ज़मउ वब्तल्लतिल-उरूक़ु व सबतल-अज्रु इंशाअल्लाह

हिंदी अर्थ:

“प्यास बुझ गई, नसें तर हो गईं और इंशाअल्लाह अज्र (नेकी) साबित हो गई।”

यह दुआ अबू दाऊद (2357) में हज़रत इब्ने उमर (रज़ि. अल्लाहु अन्हु) से रिवायत की गई है। यह दुआ भी सुन्नत से साबित है और इफ्तार के बाद पढ़ी जाती है।

Roza Kholne Ki Dua – कब और कैसे पढ़ें

Roza Kholne Ki Dua उस वक्त पढ़ी जाती है जब:

  • मग़रिब की अज़ान शुरू हो
  • सूरज के डूबने की तसदीक़ हो जाए
  • खजूर या पानी से रोज़ा तोड़ते समय

सबसे अफ़ज़ल यह है कि पहले एक खजूर या चंद घूँट पानी पीकर रोज़ा तोड़ा जाए और साथ में यह दुआ पढ़ी जाए। अगर खजूर न हो तो सिर्फ़ पानी भी काफ़ी है। यह सुन्नत तरीका है जो नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने बताया है।

अस्वीकरण (Disclaimer) : इस लेख में दी गई दुआएँ और इस्लामिक जानकारी प्रामाणिक स्रोतों जैसे क़ुरआन, हदीस और विश्वसनीय विद्वानों के हवाले से ली गई हैं। This article is written for informational and educational purposes only.

Roza Kholne Ki Dua Shia – शिया मज़हब के अनुसार

Roza Kholne Ki Dua Shia परंपरा में भी पढ़ी जाती है। शिया मुसलमान इफ्तार के वक्त अक्सर यह दुआ पढ़ते हैं:

अरबी:

بِسْمِ اللَّهِ اللَّهُمَّ لَكَ صُمْنَا وَعَلَى رِزْقِكَ أَفْطَرْنَا فَتَقَبَّلْ مِنَّا إِنَّكَ أَنْتَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ

उच्चारण:

बिस्मिल्लाह, अल्लाहुम्मा लका सुम्ना व अला रिज़्क़िका अफ़्तर्ना, फ़तक़ब्बल मिन्ना इन्नका अन्तस्-समीउल अलीम

हिंदी अर्थ:

“अल्लाह के नाम से शुरू करता हूँ। ऐ अल्लाह! हमने तेरे लिए रोज़ा रखा और तेरे रिज़्क़ से रोज़ा तोड़ा। हमसे क़बूल फ़रमा, बेशक तू सुनने वाला और जानने वाला है।”

दोनों मज़हबों की बुनियादी दुआ का मक़सद एक ही है अल्लाह तआला का शुक्र अदा करना और रोज़ा क़बूल होने की दुआ करना।

Roza Kholne Ki Dua के फ़ायदे और रूहानी अहमियत

1. अल्लाह का शुक्र अदा होता है

यह दुआ हमें याद दिलाती है कि रोज़ा रखना अल्लाह की तौफ़ीक़ से मुमकिन हुआ। शुक्रगुज़ारी का यह जज़्बा ईमान को मज़बूत करता है।

2. रोज़ा मुकम्मल होता है

जिस तरह रोज़ा शुरू करने से पहले नियत की जाती है, उसी तरह इफ्तार की दुआ रोज़े के खात्मे को मुकम्मल करने का सुन्नत तरीका है।

3. दुआओं के क़बूल होने का खास वक्त

एक मशहूर हदीस में आया है कि रोज़ेदार की दुआ इफ्तार के वक्त रद्द नहीं होती (इब्ने माजा)। इसलिए यही वक्त दुआओं के क़बूल होने का खास मौक़ा है।

4. नबी करीम (SAW) की सुन्नत पर अमल

यह दुआ पढ़ना नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत है। सुन्नत पर अमल करना खुद अपने आप में एक बड़ी नेमत और सवाब का ज़रिया है।

5. नियत की ताज़गी

यह दुआ रोज़ेदार को याद दिलाती है कि उसने यह रोज़ा किस नियत से रखा था सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए। इफ्तार के वक्त नियत को दोबारा ताज़ा कर देती है।

रोज़ा खोलने का सही तरीका – सुन्नत के मुताबिक़

रोज़ा तोड़ने का सुन्नत तरीका इस प्रकार है:

  1. अज़ान सुनने का इंतज़ार करें – सूरज डूबने की तसदीक़ हो जाए।
  2. बिस्मिल्लाह पढ़कर खजूर या पानी से रोज़ा तोड़ें।
  3. Roza Kholne Ki Dua पढ़ें – ऊपर दी गई दुआ ज़रूर पढ़ें।
  4. नमाज़-ए-मग़रिब अदा करें – पहले नमाज़, फिर खाना अफ़ज़ल है।
  5. खजूर की तक़ संख्या सुन्नत है – एक, तीन या पाँच खजूर खाना बेहतर है।

Read Also: Niyat Sehri Ki Dua

निष्कर्ष – Roza Kholne Ki Dua की अहमियत 

Roza Kholne Ki Dua In Hindi हो या किसी भी ज़बान में पढ़ी जाए, इसकी रूह एक ही है अल्लाह तआला का दिल से शुक्र और रोज़ा क़बूल होने की दुआ। यह मुख्तसर दुआ हमारे रोज़ेदार होने के मक़सद को याद दिलाती है।

रमज़ान का पूरा महीना इबादत का मौसम है, और इफ्तार का यह लम्हा ख़ुसूसी तौर पर बरकत वाला होता है। इस वक्त अल्लाह के सामने अपना सिर झुकाना, Roza Kholne Ki Dua पढ़ना और अपनी ज़रूरतें माँगना एक आला अमल है।

अल्लाह तआला से दुआ है कि वह हमारे तमाम रोज़े क़बूल फ़रमाए, हमारे गुनाहों को माफ़ करे और हमारे हर इफ्तार को बरकत वाला बनाए। आमीन।

? FAQs अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल 1: Roza Kholne Ki Dua कौन सी है?

जवाब: Roza Kholne Ki Dua यह है “अल्लाहुम्मा लका सुम्तु व बिका आमन्तु व अलैका तवक्कल्तु व अला रिज़्क़िका अफ़्तर्तु।” हिंदी में इसका मतलब है ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा, तुझ पर ईमान लाया और तेरे रिज़्क़ से रोज़ा तोड़ा।

सवाल 2: क्या Roza Kholne Ki Dua पढ़ना ज़रूरी है?

जवाब: यह सुन्नत है, फ़र्ज़ नहीं। लेकिन इस दुआ को पढ़ना बहुत अफ़ज़ल (मुस्तहब) है क्योंकि यह नबी करीम (SAW) का तरीका था।

सवाल 3: Roza Kholne Ki Dua कब पढ़ी जाती है?

जवाब: यह दुआ इफ्तार के वक्त पढ़ी जाती है जब मग़रिब की अज़ान होती है या सूरज डूब जाता है। खजूर या पानी से रोज़ा तोड़ते समय इसे पढ़ें।

सवाल 4: Roza Kholne Ki Dua In Arabic कैसे लिखी जाती है?

जवाब: अरबी में Roza Kholne Ki Dua इस तरह है: اللَّهُمَّ لَكَ صُمْتُ وَبِكَ آمَنْتُ وَعَلَيْكَ تَوَكَّلْتُ وَعَلَى رِزْقِكَ أَفْطَرْتُ

सवाल 5: Roza Kholne Ki Dua Shia और सुन्नी में क्या फ़र्क़ है?

जवाब: बुनियादी मक़सद दोनों में एक जैसा है अल्लाह का शुक्र अदा करना। अल्फ़ाज़ में थोड़ा फ़र्क़ हो सकता है लेकिन दोनों में अल्लाह से रोज़ा क़बूल करने की दुआ की जाती है।

सवाल 6: इफ्तार में और कौन सी दुआएँ पढ़ी जा सकती हैं?

जवाब: इफ्तार के वक्त कोई भी दुआ पढ़ना क़बूल हो सकता है। यह हदीस मशहूर है: “तीन लोगों की दुआ रद्द नहीं होती रोज़ेदार की जब वह रोज़ा खोलता है, आदिल हाकिम की, और मज़लूम की।” (इब्ने माजा)

Written by: Ahmad Raza

Credentials: Islamic Studies Content Writer

🤲 Read More duas for daily life at Islamic Dua Hub