जुमे का दिन इस्लाम में सबसे बरकत वाला दिन है। हर शुक्रवार को मुसलमान मर्द मस्जिद में जमा होते हैं, इमाम का खुतबा सुनते हैं और फिर जमाअत के साथ जुमे की नमाज़ अदा करते हैं। यह एक ऐसी इबादत है जिसे अल्लाह तआला ने खास तौर पर मर्दों पर फर्ज़ किया है।
Jumma Ki Namaz Ki Rakat कितनी होती हैं, किस तरतीब से पढ़ी जाती हैं और मर्द व औरत के लिए इसका हुक्म क्या है यह सवाल बहुत से मुसलमानों के मन में आता है। यहाँ इन सभी सवालों के जवाब साहिह हदीसों की रोशनी में दिए जा रहे हैं।
अल्लाह तआला ने क़ुरआन में फरमाया:
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا نُودِيَ لِلصَّلَاةِ مِن يَوْمِ الْجُمُعَةِ فَاسْعَوْا إِلَىٰ ذِكْرِ اللَّهِ وَذَرُوا الْبَيْعَ
तर्जुमा: “ऐ ईमान वालो! जब जुमे के दिन नमाज़ के लिए अज़ान दी जाए तो अल्लाह के ज़िक्र की तरफ दौड़ो और ख़रीद-फ़रोख्त छोड़ दो।” (सूरह अल-जुमुआ 62:9)
Jumma Ki Namaz Ki Rakat Kitni Hoti Hai?
यह सबसे ज़रूरी सवाल है। जुमा की नमाज में कुल 14 रकात होती हैं, जिसमें मुख्य रूप से इमाम के पीछे 2 रकात फर्ज (जामत के साथ) और बाकी सुन्नत व नफिल नमाजें होती हैं।
हनफी मसलक के मुताबिक जो हिंदुस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में सबसे ज़्यादा माना जाता है Jumma Ki Namaz Ki Rakat Sunni तफ्सील इस तरह है:
| नमाज़ | रकातें | हुक्म |
|---|---|---|
| पहले की सुन्नत | 4 रकात | सुन्नत मुअक्कदह |
| जुमे का फर्ज़ | 2 रकात | फर्ज़ (जमाअत के साथ) |
| बाद की सुन्नत मुअक्कदह | 4 रकात | सुन्नत मुअक्कदह |
| बाद की सुन्नत | 2 रकात | सुन्नत |
| नफ़्ल | 2 रकात | मुस्तहब (इख़्तियारी) |
Disclaimer: यह आर्टिकल सिर्फ इस्लामी जानकारी फैलाने के मक़सद से लिखा गया है। इसमें दी गई तमाम मालूमात क़ुरआन, साहिह हदीस और मुस्तनद इस्लामी किताबों से ली गई है। किसी भी मसले में शक हो या कोई ख़ास फ़िक़्ही रहनुमाई दरकार हो तो अपने इलाक़े के क़ाबिल और मुस्तनद आलिम-ए-दीन से रुजू करें। इस वेबसाइट का मक़सद किसी मसलक की तरफ़दारी करना नहीं, बल्कि सहीह और आसान इस्लामी मालूमात अवाम तक पहुँचाना है।
कुल: 14 रकात
इसमें सबसे अहम हिस्सा 2 रकात फर्ज़ है जो इमाम के पीछे जमाअत के साथ पढ़ी जाती है। यही असल जुमे की नमाज़ है।
Jumma Ki Namaz Ki Rakat – पूरी तफ्सील
1. पहले की 4 रकात सुन्नत मुअक्कदह
जब इमाम खुतबे के लिए मिम्बर पर चढ़ने से पहले हो, उस वक़्त नमाज़ी अपनी जगह 4 रकात सुन्नत अकेले पढ़े।
नियत (अरबी में):
نَوَيْتُ أَنْ أُصَلِّيَ أَرْبَعَ رَكَعَاتٍ سُنَّةَ الْجُمُعَةِ لِلَّهِ تَعَالَى
रोमन उच्चारण: Nawaytu an usalliya arba’a raka’aatin sunnatal jumu’ati lillahi ta’ala
अर्थ: “मैं अल्लाह तआला के लिए जुमे की 4 रकात सुन्नत पढ़ने की नियत करता हूँ।”
2. जुमे की 2 रकात फर्ज़ — असल जुमे की नमाज़
यही जुमे की नमाज़ का फर्ज़ हिस्सा है। यह इमाम के पीछे जमाअत के साथ पढ़ी जाती है अकेले नहीं पढ़ी जा सकती।
नियत (अरबी में):
نَوَيْتُ أَنْ أُصَلِّيَ رَكْعَتَيْنِ فَرْضَ الْجُمُعَةِ لِلَّهِ تَعَالَى
रोमन उच्चारण: Nawaytu an usalliya rak’ataini fardal jumu’ati lillahi ta’ala
अर्थ: “मैं अल्लाह तआला के लिए जुमे की 2 रकात फर्ज़ पढ़ने की नियत करता हूँ।”
दोनों रकातों में इमाम सूरह फातिहा और कोई दूसरी सूरत ज़ोर से पढ़ता है। मुक्तदी चुपचाप पीछे चलते हैं।
3. बाद की 4 रकात सुन्नत मुअक्कदह
फर्ज़ पूरा होने के बाद 4 रकात सुन्नत मुअक्कदह अकेले पढ़ें।
नियत (अरबी में):
نَوَيْتُ أَنْ أُصَلِّيَ أَرْبَعَ رَكَعَاتٍ سُنَّةً بَعْدَ الْجُمُعَةِ لِلَّهِ تَعَالَى
रोमन उच्चारण: Nawaytu an usalliya arba’a raka’aatin sunnatan ba’dal jumu’ati lillahi ta’ala
अर्थ: “मैं अल्लाह तआला के लिए जुमे के बाद की 4 रकात सुन्नत पढ़ने की नियत करता हूँ।”
4. बाद की 2 रकात सुन्नत
4 सुन्नत के बाद 2 और रकात सुन्नत अकेले पढ़ें।
5. 2 रकात नफ़्ल (इख़्तियारी)
आखिर में 2 रकात नफ़्ल पढ़ना मुस्तहब है। यह ज़रूरी नहीं लेकिन इसमें बड़ा अज्र है।
Jumma Ki Namaz Ki Rakat Kaise Padhe – क़दम-ब-क़दम तरीका
Jumma Ki Namaz Ki Rakat Kaise Padhe — यह पूरा तरीका नीचे दिया जा रहा है:
पहला क़दम — जल्दी मस्जिद जाएं जुमे के दिन ग़ुस्ल करना, साफ़ कपड़े पहनना और अत्र लगाना सुन्नत है। जितनी जल्दी हो मस्जिद पहुँचें।
दूसरा क़दम — 4 रकात सुन्नत पढ़ें अज़ान से पहले या इमाम के मिम्बर पर जाने से पहले 4 रकात सुन्नत अकेले पढ़ें।
तीसरा क़दम — खुतबा सुनें अज़ान के बाद इमाम दो खुतबे देगा। चुपचाप ध्यान से सुनें खुतबे के दौरान बोलना मकरूह है।
चौथा क़दम — इमाम के पीछे 2 रकात फर्ज़ पढ़ें यही जुमे की असली नमाज़ है। इमाम की अकबीर-ए-तहरीमा के साथ नियत बाँधें और पूरी नमाज़ इमाम के साथ अदा करें।
पाँचवाँ क़दम — 4 रकात सुन्नत पढ़ें फर्ज़ के बाद अपनी जगह 4 सुन्नत मुअक्कदह अकेले पढ़ें।
छठा क़दम — 2 रकात सुन्नत पढ़ें 4 सुन्नत के बाद 2 और रकात सुन्नत पढ़ें।
सातवाँ क़दम — 2 रकात नफ़्ल (चाहें तो) आखिर में 2 रकात नफ़्ल पढ़ना बड़े अज्र का काम है।
Jumma Ki Namaz Ki Rakat In Hindi – संक्षिप्त जानकारी
Jumma Ki Namaz Ki Rakat In Hindi में एक नज़र में:
- 4 रकात सुन्नत — जुमे से पहले (अकेले)
- 2 रकात फर्ज़ — इमाम के पीछे जमाअत के साथ (यही असल जुमा है)
- 4 रकात सुन्नत मुअक्कदह — जुमे के बाद (अकेले)
- 2 रकात सुन्नत — जुमे के बाद (अकेले)
- 2 रकात नफ़्ल — जुमे के बाद (इख़्तियारी)
कुल 14 रकात — जिनमें सबसे ज़रूरी इमाम के पीछे 2 रकात फर्ज़ हैं।
Jumma Ki Namaz Ki Rakat In Urdu
Jumma Ki Namaz Ki Rakat In Urdu میں مختصر تفصیل:ری
4 رکعات سنت مؤکدہ — جمعہ سے پہلے (تنہا)
2 رکعات فرض — امام کے پیچھے باجماعت (یہی اصل جمعہ کی نماز ہے)
4 رکعات سنت مؤکدہ — جمعہ کے بعد (تنہا)
2 رکعات سنت — جمعہ کے بعد (تنہا)
2 رکعات نفل — اختیاری
Jumma Ki Namaz Ki Rakat In English – Quick Summary
Jumma Ki Namaz Ki Rakat In English at a glance:
- 4 Rak’ahs Sunnah — before Jumma (individually)
- 2 Rak’ahs Fard — behind the Imam in congregation (the obligatory Jumma prayer)
- 4 Rak’ahs Sunnah Mu’akkadah — after Jumma (individually)
- 2 Rak’ahs Sunnah — after Jumma (individually)
- 2 Rak’ahs Nafl — optional, after Jumma
Total: 14 rak’ahs, with the core being 2 Fard behind the Imam
Jumma Ki Namaz Ki Rakat For Men – मर्दों के लिए हुक्म
Jumma Ki Namaz Ki Rakat For Men — मर्दों पर जुमे की नमाज़ फर्ज़ है।
नबी करीम ﷺ ने फरमाया:
“जुमे की नमाज़ हर मुसलमान पर फर्ज़ है बशर्ते कि वह ग़ुलाम, औरत, बच्चा या बीमार न हो।” (सुनन अबू दाऊद, हदीस 1067)
जिन मर्दों पर जुमा फर्ज़ है वो यह हैं:
- बालिग़ (जवान) हो
- आज़ाद हो
- मुक़ीम हो (मुसाफिर न हो)
- तंदुरुस्त हो (बीमार न हो)
अगर कोई मर्द बिना किसी शरई उज्र के जुमे की नमाज़ छोड़ दे तो यह बड़ा गुनाह है।
Jumma Ki Namaz Ki Rakat For Ladies / Women – औरतों के लिए हुक्म
Jumma Ki Namaz Ki Rakat For Ladies का मसला बहुत अहम है।
जमहूर उलमा (हनफी, शाफिई, मालिकी और हंबली सभी) के नज़दीक औरतों पर जुमे की नमाज़ फर्ज़ नहीं है। लेकिन अगर कोई औरत मस्जिद में जाकर इमाम के पीछे जुमा पढ़ ले तो उसकी नमाज़ दुरुस्त और क़ाबिल-ए-क़बूल है।
Jumma Ki Namaz Ki Rakat For Women — घर पर क्या पढ़ें?
अगर औरत मस्जिद न जाए तो वह घर पर ज़ुहर की 4 रकात फर्ज़ पढ़ेगी।
घर पर औरत की नमाज़ की तर्तीब:
- 4 रकात सुन्नत — ज़ुहर से पहले
- 4 रकात फर्ज़ ज़ुहर
- 2 रकात सुन्नत — ज़ुहर के बाद
- 2 रकात नफ़्ल — इख़्तियारी
अगर औरत मस्जिद जाए और इमाम के पीछे नमाज़ पढ़े तो 2 रकात फर्ज़ उसकी ज़ुहर की जगह क़बूल होगी।
Jumma Ki Namaz Ki Rakat Sunni – हनफी मसलक की तफ्सील
Jumma Ki Namaz Ki Rakat Sunni के हनफी मसलक के मुताबिक़ तर्तीब:
| नंबर | नमाज़ | रकातें | क़िस्म |
|---|---|---|---|
| 1 | जुमे से पहले | 4 | सुन्नत मुअक्कदह |
| 2 | जुमे का फर्ज़ | 2 | फर्ज़ (जमाअत के साथ) |
| 3 | जुमे के बाद | 4 | सुन्नत मुअक्कदह |
| 4 | जुमे के बाद | 2 | सुन्नत |
| 5 | जुमे के बाद | 2 | नफ़्ल (इख़्तियारी) |
ज़रूरी बात: शाफिई मसलक में कुछ उलमा फर्ज़ से पहले सिर्फ 2 रकात सुन्नत बताते हैं। लेकिन 2 रकात फर्ज़ सभी सुन्नी मसालिक में एक जैसी है।
नमाज़-ए-जुमा के बाद की दुआ
जुमे की नमाज़ के बाद यह दुआ पढ़ना सुन्नत है:
अरबी:
اللَّهُمَّ أَنْتَ السَّلَامُ وَمِنْكَ السَّلَامُ تَبَارَكْتَ يَا ذَا الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ
रोमन उच्चारण: Allahumma anta-s-Salamu wa minka-s-Salam, tabarakta ya Dhal-Jalali wal-Ikram
अर्थ: “ऐ अल्लाह! तू ही सलामती है और तुझसे ही सलामती है। तू बरकत वाला है ऐ बुज़ुर्गी और इज़्ज़त वाले।” (साहिह मुस्लिम, हदीस 591 रावी: सौबान RA)
जुमे के दिन की फज़ीलत
नबी करीम ﷺ ने जुमे के दिन की बड़ी तारीफ़ फरमाई है:
“सूरज जिन दिनों में उगता है उनमें सबसे बेहतर जुमे का दिन है। इसी दिन आदम (AS) पैदा हुए, इसी दिन जन्नत में दाखिल हुए, इसी दिन जन्नत से निकाले गए और क़यामत भी जुमे के दिन ही क़ायम होगी।” (साहिह मुस्लिम, हदीस 854 रावी: अबू हुरैरा RA)
एक और फरमान:
“पाँच वक़्त की नमाज़ें और एक जुमे से दूसरे जुमे तक ये सब बीच के गुनाहों का कफ्फारा हैं, जब तक कि कबीरा गुनाहों से बचा जाए।” (साहिह मुस्लिम, हदीस 233 रावी: अबू हुरैरा RA)
जुमे की नमाज़ पूरी अदा करने के फायदे
Jumma Ki Namaz Ki Rakat पूरी तर्तीब से पढ़ने में कई रूहानी फायदे हैं:
1. गुनाहों की माफ़ी एक जुमे से दूसरे जुमे तक के छोटे गुनाह माफ़ हो जाते हैं। (साहिह मुस्लिम, 233)
2. दुआ क़बूल होने का ख़ास वक़्त जुमे में एक ऐसी घड़ी है जिसमें माँगी हुई हर दुआ क़बूल होती है। (साहिह बुखारी, 935)
3. नबी ﷺ से क़ुर्बत जुमे के दिन कसरत से दुरूद पढ़ने से नबी ﷺ से रूहानी क़ुर्बत हासिल होती है।
4. दज्जाल से हिफ़ाज़त जो शख्स जुमे के दिन सूरह अल-कहफ की पहली दस आयतें पढ़े वह दज्जाल के फितने से महफूज़ रहता है। (साहिह मुस्लिम)
5. उम्मत में एकता हफ्तावारी जमाअत मुसलमानों को आपस में जोड़ती है और भाईचारे को मज़बूत बनाती है।
जुमे के दिन के सुन्नत आमाल
जुमे के दिन ये काम करना सुन्नत है:
- जुमे से पहले ग़ुस्ल करना
- साफ़ और बेहतर कपड़े पहनना
- अत्र लगाना
- सूरह अल-कहफ पढ़ना
- नबी ﷺ पर कसरत से दुरूद पढ़ना
- मस्जिद में जल्दी पहुँचना और आगे बैठना
जिन बातों से बचें:
- दूसरी अज़ान के बाद कारोबार मत करें (क़ुरआन 62:9)
- खुतबे के दौरान बात मत करें
- जमाअत में बैठे लोगों के सिरों पर से मत गुज़रें
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निष्कर्ष (Conclusion)
Jumma Ki Namaz Ki Rakat हर मुसलमान को साफ़ तौर पर मालूम होनी चाहिए। जुमा की नमाज में कुल 14 रकात होती हैं, जिसमें मुख्य रूप से इमाम के पीछे 2 रकात फर्ज (जामत के साथ) और बाकी सुन्नत व नफिल नमाजें होती हैं।
मर्दों के लिए जुमे में शरीक होना फर्ज़ है। Jumma Ki Namaz Ki Rakat For Men में पूरी तर्तीब पहले की 4 सुन्नत, 2 फर्ज़ और बाद की 4 + 2 सुन्नत सभी का ख़्याल रखना चाहिए। Jumma Ki Namaz Ki Rakat For Women के बारे में यह याद रखें कि औरतों पर यह फर्ज़ नहीं है वे घर पर ज़ुहर की नमाज़ पढ़ें। Jumma Ki Namaz Ki Rakat Sunni यानी हनफी मसलक में कुल 14 रकात हैं।
जुमा का दिन हफ्ते का सबसे बेहतरीन दिन है। अल्लाह तआला ने इस दिन को बड़ी बरकत और फज़ीलत से नवाज़ा है। हर मुसलमान को चाहिए कि वह इस दिन का पूरा हक़ अदा करे ग़ुस्ल करे, जल्दी मस्जिद जाए, खुतबा ध्यान से सुने, सूरह अल-कहफ पढ़े, दुरूद की कसरत करे और Jumma Ki Namaz पूरी तर्तीब से अदा करे।
अल्लाह तआला हमारे जुमे की नमाज़ें क़बूल फरमाए, हमें हर हफ्ते पाबंदी से जुमा पढ़ने की तौफीक़ दे और हमारे गुनाहों को माफ़ फरमाए।
آمین یا رب العالمین (आमीन या रब्बल आलमीन)
? FAQs – Jumma Ki Namaz Ki Rakat
सवाल 1: Jumma Ki Namaz Ki Rakat Kitni Hoti Hai?
जुमा की नमाज में कुल 14 रकात होती हैं, जिसमें मुख्य रूप से इमाम के पीछे 2 रकात फर्ज (जामत के साथ) और बाकी सुन्नत व नफिल नमाजें होती हैं। यानी: 4 सुन्नत (पहले) + 2 फर्ज़ (इमाम के साथ) + 4 सुन्नत + 2 सुन्नत + 2 नफ़्ल।
सवाल 2: Jumma Ki Namaz Ki Rakat For Ladies — औरतें क्या पढ़ें?
औरतों पर जुमा फर्ज़ नहीं। अगर मस्जिद न जाएं तो घर पर ज़ुहर की 4 रकात फर्ज़ पढ़ें। अगर मस्जिद जाएं तो इमाम के पीछे 2 रकात फर्ज़ काफी है।
सवाल 3: Jumma Ki Namaz Ki Rakat Sunni मसलक में कितनी हैं?
हनफी सुन्नी मसलक में कुल 4 + 2 + 4 + 2 रकात (सुन्नत और फर्ज़) और 2 रकात नफ़्ल यानी कुल 14 रकात।
सवाल 4: क्या जुमे की नमाज़ घर पर पढ़ी जा सकती है?
नहीं। जुमे के 2 रकात फर्ज़ के लिए जमाअत और मस्जिद ज़रूरी है। अकेले घर पर नहीं पढ़ी जा सकती। अगर जुमा छूट जाए तो ज़ुहर की 4 रकात पढ़ें।
सवाल 5: अगर इमाम के साथ एक रकात छूट जाए तो क्या करें?
अगर दूसरी रकात में इमाम के साथ शामिल हुए तो इमाम के सलाम के बाद एक रकात खुद पूरी करें। अगर इमाम का सलाम हो चुका हो तो जुमा छूट गया अब ज़ुहर की 4 रकात पढ़ें।
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