Tahajjud Namaz Ki Niyat – अरबी, हिंदी, उर्दू में पढ़ें और तरीका जानें

Tahajjud Namaz Ki Niyat यह वह पहला क़दम है जो एक मुसलमान रात की तारीकी में अल्लाह की तरफ़ बढ़ाता है। तहज्जुद इस्लाम की सबसे अफ़ज़ल नफ़्ल इबादत में से एक है, जो रात के आख़िरी हिस्से में सोने के बाद उठकर अदा की जाती है। अल्लाह तआला ने क़ुरआन-ए-करीम में अपने नबी ﷺ को ख़ुद इस नमाज़ का हुक्म दिया और उन्हें “मक़ाम-ए-महमूद” का वादा फ़रमाया।

नियत दिल का इरादा होती है इसका मतलब है कि आप अपने दिल में यह तय कर लें कि “मैं अब तहज्जुद की नमाज़ पढ़ रहा/पढ़ रही हूँ।” ज़ुबान से नियत करना सुन्नत नहीं है, लेकिन अगर कोई बोल ले तो कोई हर्ज नहीं।

बहुत से लोग पूछते हैं कि Tahajjud Namaz Ki Niyat Kaise Kare, कितनी रकअतें होती हैं, और इसका सही वक़्त क्या है। इन्हीं सवालों का जवाब देने के लिए यह पूरा बयान तैयार किया गया है।

Table of Contents

Tahajjud Namaz Ki Niyat in Arabic

जब आप तहज्जुद की नमाज़ पढ़ने का इरादा करें तो दिल में यह नियत करें:

نَوَيْتُ أَنْ أُصَلِّيَ رَكْعَتَيْنِ لِلَّهِ تَعَالَى صَلَاةَ التَّهَجُّدِ

Roman Transliteration – रोमन में नियत

Tahajjud Namaz Ki Niyat की रोमन ट्रांसलिट्रेशन यह है:

Nawaytu an usalliya rak’ataini lillahi ta’ala salatal tahajjud.

यह उन लोगों के लिए है जो Arabic script नहीं पढ़ सकते। Tahajjud Namaz Ki Niyat in English में इसका मतलब है:

“मैं दो रकअत नमाज़ तहज्जुद अल्लाह तआला के लिए नियत करता/करती हूँ।”

Tahajjud Namaz Ki Niyat in Urdu

نیت کی میں نے دو رکعت نماز تہجد واسطے اللہ تعالیٰ کے۔

Tahajjud Namaz Ki Niyat in Urdu का यह सादा और सहीह तर्जुमा है। याद रहे कि उर्दू या हिंदी में नियत करना भी जायज़ है, क्योंकि नियत का तअल्लुक़ दिल के इरादे से है, ज़ुबान के अल्फ़ाज़ से नहीं।

Tahajjud Namaz Ki Niyat in Hindi

मैंने नियत की दो रकअत नमाज़ तहज्जुद अल्लाह ताला के लिए।

Tahajjud Namaz Ki Niyat in Hindi में यही अल्फ़ाज़ काफ़ी हैं। जो लोग देवनागरी लिपि में पढ़ना चाहते हैं, उनके लिए यह लिखा हुआ है ताकि कोई तकलीफ़ न हो।

Tahajjud Namaz क्या है?

तहज्जुद का लफ़्ज़ Arabic लफ़्ज़ “هَجَدَ” से निकला है जिसका मतलब है “रात को सोना” और “तहज्जुद” का मतलब है “रात को उठ जाना।” यानी यह वह नमाज़ है जो रात में सोने के बाद उठकर अदा की जाती है।

क़ुरआन-ए-करीम में अल्लाह तआला ने फ़रमाया:

“और रात के कुछ हिस्से में तहज्जुद करो, यह एक नफ़्ल इबादत है तेरे लिए। उम्मीद है कि तेरा रब तुझे मक़ाम-ए-महमूद पर खड़ा करे।” (सूरह अल-इसरा, 17:79)

हज़रत अबू हुरैरह (رضی اللہ عنہ) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया:

“फ़र्ज़ नमाज़ के बाद सबसे अफ़ज़ल नमाज़ रात की नमाज़ (तहज्जुद) है।” (सहीह मुस्लिम: 1163)

यह हदीस साफ़ बताती है कि Tahajjud Namaz नफ़्ल इबादात में सबसे बुलंद मक़ाम रखती है।

Tahajjud Namaz Time – सही वक़्त क्या है?

Tahajjud Namaz Time के बारे में उलमा का इत्तेफ़ाक़ है कि यह नमाज़ इशा की नमाज़ के बाद से लेकर फ़ज्र की अज़ान से पहले तक पढ़ी जा सकती है। लेकिन सबसे अफ़ज़ल वक़्त रात का आख़िरी तीसरा हिस्सा है।

रात के तीसरे हिस्से का हिसाब इस तरह लगाएं:

  • मग़रिब और फ़ज्र के दरमियान जो वक़्त है, उसे तीन हिस्सों में तक़सीम करें।
  • आख़िरी तीसरा हिस्सा Tahajjud का अफ़ज़ल वक़्त है।

मिसाल के तौर पर अगर इशा रात 9 बजे और फ़ज्र सुबह 5 बजे हो, तो रात 8 घंटे की है। आख़िरी तीसरा यानी रात 3 बजे से 5 बजे का वक़्त तहज्जुद के लिए सबसे बेहतर है।

हदीस में आया है:

“हमारा रब हर रात, जब रात का आख़िरी तीसरा हिस्सा बाक़ी रहता है, आसमान-ए-दुनिया पर उतरता है और फ़रमाता है: कौन है जो मुझसे दुआ करे, मैं क़बूल करूँ? कौन है जो मुझसे माँगे, मैं दे दूँ? कौन है जो मुझसे माफ़ी माँगे, मैं माफ़ कर दूँ?” (सहीह अल-बुख़ारी: 1145, सहीह मुस्लिम: 758)

Tahajjud Namaz Rakat – कितनी रकअतें होती हैं?

Tahajjud Namaz Rakat के बारे में उलमा का कहना है कि यह कम से कम 2 रकअतें हैं और ज़्यादा से ज़्यादा 12 रकअतें। नबी ﷺ का अमल यह था कि आप 8 रकअतें पढ़ते थे और फिर 3 रकअत वित्र अदा फ़रमाते थे।

Tahajjud Namaz Rakat का बयान:

रकअतें हाल
2 रकअत कम से कम – जायज़ और काफ़ी
4 रकअत बेहतर
8 रकअत सुन्नत-ए-नबवी ﷺ
12 रकअत अफ़ज़ल और मुकम्मल

हज़रत आइशा (رضی اللہ عنہا) फ़रमाती हैं:

“नबी ﷺ रमज़ान और ग़ैर रमज़ान में 11 रकअतों से ज़्यादा नहीं पढ़ते थे।” (सहीह अल-बुख़ारी: 1147)

इसीलिए 8 रकअत तहज्जुद और 3 रकअत वित्र कुल 11 सुन्नत-ए-नबवी ﷺ है।

Tahajjud Namaz Ka Tarika – क़दम-ब-क़दम तरीक़ा

Tahajjud Namaz Ka Tarika सीखना बहुत ज़रूरी है। यह नमाज़ दूसरी नफ़्ल नमाज़ की तरह ही पढ़ी जाती है, बस कुछ ख़ास बातें ध्यान में रखनी चाहिए:

पहला क़दम: इशा की नमाज़ के बाद सोना

पहले इशा की फ़र्ज़ नमाज़ अदा करें, फिर सो जाएं। तहज्जुद का मतलब ही यह है कि नींद के बाद उठकर पढ़ी जाए।

दूसरा क़दम: रात के आख़िरी हिस्से में उठना

अलार्म लगाएं या दुआ करें कि अल्लाह तआला ख़ुद उठाएं। नबी ﷺ ने फ़रमाया कि जो शख़्स यह नियत करके सोए कि रात को उठेगा तो उसे वह अज्र मिलेगा।

तीसरा क़दम: वुज़ू करना

उठकर पहले ताज़ा वुज़ू करना चाहिए। वुज़ू से ग़फ़लत दूर होती है और नमाज़ में ख़ुशू आता है।

चौथा क़दम: दो दो रकअत में तहज्जुद अदा करना

Tahajjud Namaz Ka Tarika यह है कि दो दो रकअत करके पढ़ें। हर दो रकअत में:

  • तकबीर-ए-तहरीमा कहें: اللَّهُ أَكْبَرُ
  • सना, सूरह फ़ातिहा और कोई सूरह पढ़ें
  • रुकू, सजदा मुकम्मल करें
  • दूसरी रकअत में यही तरतीब दोहराएं
  • सलाम फेरकर दो रकअत मुकम्मल करें

पाँचवाँ क़दम: दुआ करना

तहज्जुद के बाद दिल खोलकर दुआ माँगें। यह वक़्त अल्लाह तआला की ख़ास रहमत का वक़्त है।

छठा क़दम: वित्र पढ़कर ख़त्म करना

तहज्जुद के बाद 3 रकअत वित्र ज़रूर पढ़ें यह भी सुन्नत-ए-नबवी ﷺ है।

Tahajjud Namaz Ki Niyat Kaise Kare – मुकम्मल तरीक़ा

Tahajjud Namaz Ki Niyat Kaise Kare — यह सवाल अक्सर पहली बार पढ़ने वाले पूछते हैं।

नियत के लिए कोई ख़ास लफ़्ज़ ज़ुबान से बोलना ज़रूरी नहीं। नियत का असल मतलब दिल का इरादा है। जब आप तहज्जुद पढ़ने के लिए उठें और नमाज़ की तरफ़ खड़े हों, तो दिल में यह ख़याल आना ही काफ़ी है।

अगर ज़ुबान से बोलना चाहें तो यह अल्फ़ाज़ बोल सकते हैं:

“Nawaytu an usalliya rak’ataini lillahi ta’ala salatal tahajjud.”

हिंदी में:

“मैंने नियत की दो रकअत नमाज़ तहज्जुद अल्लाह ताला के लिए।”

उर्दू में:

“میں نے نیت کی دو رکعت نماز تہجد اللہ تعالیٰ کے لیے۔”

अगर ज़्यादा रकअतें पढ़नी हों तो “rak’ataini” की जगह “arba’ raka’at” (4 रकअत) या “saman raka’at” (8 रकअत) बोल सकते हैं।

Disclaimer: यह article Islamic knowledge के लिए है। किसी भी मसअले में अपने local alim से ज़रूर रहनुमाई लीजिए।

Tahajjud Namaz के फ़ायदे और फ़ज़ीलत

Tahajjud Namaz के फ़ायदे सिर्फ़ आख़िरत में नहीं, दुनिया में भी नज़र आते हैं। यह एक ऐसी इबादत है जो दिल को सुकून और रूह को ताज़गी देती है।

1. दुआ की क़बूलियत

रात के आख़िरी हिस्से में की गई दुआ बहुत जल्दी क़बूल होती है। नबी ﷺ ने फ़रमाया कि अल्लाह तआला ख़ुद बंदों को बुलाते हैं इस वक़्त।

2. गुनाहों की माफ़ी

क़ुरआन में अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि रात का क़ियाम गुनाहों को मिटा देता है। (सूरह हूद, 11:114)

3. अल्लाह की क़ुर्बत

तहज्जुद पढ़ने वाला बंदा अल्लाह तआला के क़रीब हो जाता है। यह एक ऐसी इबादत है जिसमें बंदे और अल्लाह के दरमियान कोई हाइल नहीं होता।

4. दिल का सुकून

जिन्हें रात को नींद नहीं आती या ज़हनी तकलीफ़ है, तहज्जुद उनके लिए शिफ़ा का ज़रिया बनती है। कई लोगों ने इस तजरुबे को ख़ुद महसूस किया है।

5. दुनियावी मुश्किलों में मददगार

नबी ﷺ ने फ़रमाया:

“तहज्जुद को अपना वज़ीफ़ा बनाओ क्योंकि यह तुमसे पहले सालिहीन का तरीक़ा था, यह अल्लाह की क़ुर्बत का ज़रिया है, गुनाहों से रोकता है, बदन की बीमारियों को दूर करता है और जहन्नम से बचाता है।” (सुनन अत-तिर्मिज़ी: 3549)

Tahajjud Namaz – ख़ास मसाइल और जवाबात

क्या तहज्जुद फ़र्ज़ है?

नहीं, तहज्जुद नफ़्ल नमाज़ है। यह सिर्फ़ नबी ﷺ पर फ़र्ज़ थी, उम्मत पर नफ़्ल है। लेकिन इसकी फ़ज़ीलत बहुत ज़्यादा है।

क्या औरत भी तहज्जुद पढ़ सकती है?

जी हाँ, तहज्जुद पढ़ना मर्द और औरत दोनों के लिए सुन्नत-ए-मुअक्कदा के क़रीब है। हज़रत आइशा (رضی اللہ عنہا) ख़ुद तहज्जुद पढ़ती थीं।

क्या सोने के बग़ैर भी तहज्जुद हो सकती है?

उलमा का एक क़ौल यह है कि अगर कोई इशा के बाद बिल्कुल न सोए तो तहज्जुद नहीं होगी, क्योंकि नींद ज़रूरी है। लेकिन अगर थोड़ी देर भी सो गए तो काफ़ी है।

तहज्जुद और क़ियाम-उल-लैल में फ़र्क़?

क़ियाम-उल-लैल रात भर की इबादत का आम नाम है। तहज्जुद ख़ास वह नमाज़ है जो नींद के बाद पढ़ी जाए। रमज़ान में तरावीह भी क़ियाम-उल-लैल में शामिल है।

तहज्जुद की दुआ – नमाज़ से पहले और बाद में

नबी ﷺ रात को तहज्जुद के लिए उठते तो यह दुआ पढ़ते:

اللَّهُمَّ لَكَ الْحَمْدُ أَنْتَ نُورُ السَّمَوَاتِ وَالأَرْضِ وَمَنْ فِيهِنَّ…

Roman Transliteration: Allahumma lakal hamdu anta nurus samawati wal ardi wa man fihinna…

हिंदी तर्जुमा: “ऐ अल्लाह! तुझी के लिए सब तारीफ़ है, तू ही आसमानों और ज़मीन का नूर है…” (सहीह अल-बुख़ारी: 1120)

तहज्जुद के बाद की दुआ

तहज्जुद के बाद यह दुआ माँगनी चाहिए:

رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ

Transliteration: Rabbana atina fid-dunya hasanatan wa fil-akhirati hasanatan wa qina ‘adhaban-nar.

हिंदी मतलब: “ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भलाई दे और आख़िरत में भलाई दे और दोज़ख़ की आग से बचा।” (सूरह अल-बक़रह, 2:201)

Tahajjud Namaz और हमारे ज़माने की ज़रूरत

आज के दौर में इंसान तरह-तरह की परेशानियों में घिरा हुआ है मेहँगाई, बीमारी, रिश्तेदारी के मसाइल, रोज़गार की तकलीफ़। इन सब के बावजूद अगर आदमी रात को थोड़ी देर अल्लाह के सामने खड़ा हो जाए तो इन सब मुश्किलों का एक और ताक़तवर हल मिलता है।

तहज्जुद सिर्फ़ इबादत नहीं, यह एक रूहानी इलाज है। यह दिल की ग़ंदगी साफ़ करती है, ग़फ़लत की नींद से जगाती है और बंदे को उस रब से जोड़ती है जो हर चीज़ पर क़ादिर है।

जो लोग पहली बार तहज्जुद शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए बेहतर है कि हफ़्ते में दो-तीन बार से शुरू करें। अल्लाह तआला इरादे की क़द्र करता है। जितना हो सके, उतना करें धीरे-धीरे यह इबादत ज़िंदगी का हिस्सा बन जाएगी।

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निष्कर्ष (Conclusion)

तहज्जुद की नियत दिल का इरादा है। ज़ुबान के अल्फ़ाज़ सिर्फ़ मददगार हैं, असास नहीं। यह नियत Arabic, Urdu, Hindi या अंग्रेज़ी किसी भी ज़ुबान में की जा सकती है, बस दिल में सच्चा इरादा होना चाहिए।

Tahajjud Namaz पढ़ना अल्लाह तआला के क़रीब होने का एक अहम ज़रिया है। नबी ﷺ ने ख़ुद इस इबादत को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाया और उम्मत को इसका हुक्म दिया। अगर आप रोज़ाना नहीं पढ़ सकते तो हफ़्ते में 2-3 बार भी पढ़ें  शुरू करो तो सही, अल्लाह तआला ख़ुद आसान कर देगा।

अल्लाह तआला हम सबको Tahajjud Namaz Ki Niyat के साथ पूरी तहज्जुद अदा करने की तौफ़ीक़ दे और इस इबादत के ज़रिए अपनी रहमत, मग़फ़िरत और क़ुर्बत अता फ़रमाए। आमीन।

FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले सवालात

Q1: Tahajjud Namaz Ki Niyat in Arabic क्या है?

जवाब: सहीह Arabic नियत है: نَوَيْتُ أَنْ أُصَلِّيَ رَكْعَتَيْنِ لِلَّهِ تَعَالَى صَلَاةَ التَّهَجُّدِ

Q2: Tahajjud Namaz Time क्या है?

जवाब: इशा के बाद से फ़ज्र से पहले तक, लेकिन सबसे अफ़ज़ल वक़्त रात का आख़िरी तीसरा हिस्सा है।

Q3: Tahajjud Namaz Rakat कितनी होती हैं?

जवाब: कम से कम 2 रकअत और ज़्यादा से ज़्यादा 12 रकअत। नबी ﷺ का अमल 8 रकअत था।

Q4: Tahajjud Namaz Ki Niyat Kaise Kare?

जवाब: दिल में पक्का इरादा करो कि “मैं तहज्जुद पढ़ रहा/रही हूँ।” ज़ुबान से बोलना ज़रूरी नहीं, लेकिन बोल सकते हैं।

Q5: क्या बिना वुज़ू के तहज्जुद पढ़ सकते हैं?

जवाब: नहीं। नमाज़ के लिए वुज़ू ज़रूरी है। रात को उठते ही पहले वुज़ू करें।

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